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बाल संरक्षण की दिशा में जशपुर के लिए 2025 रहा ऐतिहासिक वर्ष

250 बाल विवाह रोके गए, 22 बच्चों को ट्रैफिकिंग गिरोहों से कराया गया मुक्त

जशपुरनगर 31 दिसम्बर /बाल सुरक्षा एवं संरक्षण के क्षेत्र में वर्ष 2025 जशपुर जिले के लिए एक बेहतरीन उपलब्धियों भरा वर्ष रहा। जिला प्रशासन, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, ग्राम पंचायतों, शिक्षकों एवं सामुदायिक नेतृत्व के साथ समन्वय में कार्य करते हुए नागरिक समाज संगठन “एक्सेस टू जस्टिस फॉर चिल्ड्रन (समर्पित)” ने जिले में कुल 272 बच्चों को बाल विवाह एवं ट्रैफिकिंग जैसी गंभीर सामाजिक कुरीतियों से बचाया। इनमें से 250 बच्चों को बाल विवाह से तथा 22 बच्चों को बाल तस्करी (ट्रैफिकिंग) के चंगुल से मुक्त कराया गया। ट्रैफिकिंग से मुक्त कराए गए बच्चों में 10 बालिकाएं एवं 12 बालक शामिल हैं।

उल्लेखनीय है कि “एक्सेस टू जस्टिस फॉर चिल्ड्रन (समर्पित)” देश में बाल अधिकारों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए कार्यरत सबसे बड़े नागरिक समाज नेटवर्क “जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन (जेआरसी)” का सहयोगी संगठन है। जेआरसी नेटवर्क के 250 से अधिक सहयोगी संगठन देश के 451 जिलों में बाल अधिकारों की रक्षा, बाल विवाह एवं बाल तस्करी रोकने हेतु कार्य कर रहे हैं। इस नेटवर्क ने 1 जनवरी 2025 से अब तक देशभर में 1,98,628 बाल विवाह रोकने तथा 55,146 बच्चों को ट्रैफिकिंग से मुक्त कराने में सफलता हासिल की है, जिनमें 40,830 बालक एवं 14,316 बालिकाएं शामिल हैं। इसके साथ ही बाल तस्करी से जुड़े 42,217 प्रकरण दर्ज कराए गए हैं।

इस उल्लेखनीय सफलता पर “एक्सेस टू जस्टिस फॉर चिल्ड्रन (समर्पित)” के निदेशक डॉ. संदीप शर्मा ने कहा कि बाल सुरक्षा की दिशा में वर्ष 2025 ऐतिहासिक रहा है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन, पुलिस, पंचायत प्रतिनिधियों और शिक्षकों के साथ जमीनी स्तर पर किए गए समन्वित प्रयासों से वास्तविक बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रैफिकिंग से बच्चों को मुक्त कराना केवल पहला कदम है, इसके बाद उनका पुनर्वास, स्कूलों में पुनः नामांकन तथा कल्याणकारी योजनाओं से जोड़कर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सशक्त बनाना आवश्यक है, ताकि गरीबी, बाल मजदूरी और बाल विवाह के दुष्चक्र को स्थायी रूप से तोड़ा जा सके।

नेटवर्क का लक्ष्य वर्ष 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त बनाना है। इसके लिए रेलवे सुरक्षा बल सहित सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय कर समय रहते हस्तक्षेप किया जा रहा है। साथ ही देशभर में सभी धर्मों के तीन लाख से अधिक धार्मिक नेताओं को इस अभियान से जोड़ा गया है, जो यह संदेश फैला रहे हैं कि बाल विवाह न केवल गैरकानूनी है बल्कि किसी भी धर्म में इसकी स्वीकृति नहीं है। जिले के कई धार्मिक स्थलों में अब स्पष्ट बोर्ड लगाए गए हैं कि यहां बाल विवाह की अनुमति नहीं है।

इसके अलावा “बाल विवाह मुक्त भारत” अभियान के तहत केंद्र सरकार के 100 दिवसीय विशेष जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत टेंट, बैंड, दर्जी, सजावटकर्ता एवं कैटरर्स जैसे विवाह से जुड़े सेवा प्रदाताओं को भी जागरूक किया जा रहा है कि बाल विवाह में किसी भी प्रकार की भागीदारी कानूनन अपराध है। इन समन्वित प्रयासों से जशपुर जिले में बाल सुरक्षा के क्षेत्र में एक नई जागरूकता और सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।

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