छत्तीसगढ़

रायपुर नगर-निगम के आयुक्त, उपायुक्त और अधिकारियों को एस.पी. रायपुर के माध्यम से बुलाया जायेगा

एम आई टी वाले आयोग की सूचना के बाद भी सुनवाई में अनुपस्थित रहे, पुलिस के माध्यम से उपस्थिति करायेगा आयोग

महज सौतेली सास होने के कारण 5 वर्ष तक रिश्ता नहीं रखने वाली बहू 5 साल बाद सास के खिलाफ शिकायत का अधिकार नहीं रखती

आयोग की समझाईश पर पति-पत्नि साथ रहने को हुए तैयार

रायपुर/21 नवंबर 2025/ छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक, ने आज छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के कार्यालय रायपुर में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों पर सुनवाई की। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में प्रदेश स्तर पर आज 351 वी. एवं रायपुर जिले में 170 वी. जनसुनवाई की गई।

आज की सुनवाई के दौरान एक प्रकरण में नगर-निगम रायपुर के आयुक्त, उपायुक्त के खिलाफ आवेदिका ने प्रकरण प्रस्तुत किया है। आवेदिका कि मां से बी.एस.यू.पी. मकान के एवज में 3 हजार रू. भी ले लिया है व 9 साल हो गये आज तक मकान नहीं दिया गया है। आवेदिका की मां की मृत्यु हो चुकी है और उसका मकान भी नगर-निगम के द्वारा 2013 में तोड़ दिया गया था। आवेदिका को इस बात की आशंका है कि किसी अन्य व्यक्ति से अधिकारियों की मिली-भगत से उसे आबंटित मकान किसी अन्य को दे दिया गया है।ऐसी दशा में सभी अनावेदकगणों को एस.पी. रायपुर के माध्यम से उपस्थिति का पत्र भेजे जाने का निर्देश आयोग द्वारा दिया गया। एक प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि कॉलेज प्रबंधन की प्रताड़ना से तंग आकर आवेदिका की बेटी ने आत्महत्या कर ली। कॉलेज प्रबंधन द्वारा घटना को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। आज की सुनवाई के दौरान भी अनावेदक पक्ष आयोग की सुनवाई में अनुपस्थित रहे। ऐसी दशा में एमिटी यूनिवर्सिटी के समस्त पदाधिकारिगणों को थाना के माध्यम से उपस्थिति का आदेश आयोग द्वारा दिया गया। एक प्रकरण में आवेदिका ने बताया की आवेदिका को अनुकम्पा नियुक्ति के लिए रायपुर नगर-निगम आयुक्त व अधिकारियों द्वारा घुमाया जा रहा है। अनुकम्पा नियुक्ति के लिए 2016 से आवेदन लगाया है और 09 साल हो गया है। अब तक आवेदिका को अनुकम्पा नियुक्ति नहीं दी जा रही है। आवेदिका को गुमराह किया जा रहा है। सुनवाई के दौरान अनावेदक अनुपस्थित रहे है। आयोग ने अनावेदक की उपस्थिति हेतु एस.पी. रायपुर को पत्र लिखने के निर्देश दिये। ताकि प्रकरण का निराकरण किया जा सके। एक प्रकरण के दौरान आयोग द्वारा उभय पक्ष की विस्तृत काउंसलिंग की गई। काउंसलिंग के दौरान उभय पक्षों ने साथ रहने की सहमति जताई। उभय पक्षों का इकरारनाम बनाये जाने के पश्चात् प्रकरण नस्तीबध्द किया जा सकेगा। आयोग द्वारा प्रकरण की निगरानी 1 वर्ष तक किये जाने का निर्देश दिया गया। एक अन्य प्रकरण में आवेदिका अपने विवाह के पश्चात् केवल 20 दिन अपने ससुराल में रही उसके बाद अपने पति के साथ किराये के मकान में रहने चली गई। अनावेदक(पति) की मां की मृत्यु के पश्चात् आवेदिका की मौसी से अनावेदक के पिता ने विवाह किया व 11 माह की उम्र से वह उसका पालन-पोषण कर रही है। अनावेदिका सास को सौतेली कहकर उसने अपने सास-ससुर, देवर व ननंद से कोई व्यवहार, आना-जाना नहीं रखा। वर्तमान में आवेदिका के पति 06 माह से आवेदिका को छोड़ रखा है और कहीं चला गया है। आवेदिका ने कहा कि उसके पास अनावेदक(पति) का कोई पता या मो. नं. नहीं है। आयोग द्वारा आवेदिका को 1 माह का समय दिया गया कि वह अपने पति का पता प्रस्तुत करें। इस प्रकरण से आवेदिका के सास-ससुर को प्रकरण से मुक्त किया गया। एक प्रकरण में उभय पक्ष शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में प्राचार्य के पद पर रह चुके है। दोनो के मध्य लगातार शिक्षा विभाग में शिकायत चल रही है। जिस पर कुछ पर कार्यवाही चल रही है। यह प्रकरण कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न कानून से संबंधित नहीं होने के कारण शिक्षा विभाग से कार्यवाही हो सकती है। उभय पक्षों को समझाईश दिया गया कि उभय पक्ष अपने विभागिय अधिकारियों से मिलकर शिकायत का निराकरण करवा सकते है। समझाईश के पश्चात् प्रकरण आयोग से नस्तीबध्द किया गया।

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