पंचकोश, षट्चक्र और आभामंडल की अवधारणाओं पर विशेषज्ञों ने साझा की जानकारी, स्वामी महेश और डॉ. अनिल गुप्ता ने किया संवाद

रायपुर, 19 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग एवं छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज़ के संयुक्त तत्वावधान में ‘स्वयं से साक्षात्कार’ विषय पर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा में वर्णित ऊर्जा, चेतना, पंचकोश, षट्चक्र और आभामंडल जैसी अवधारणाओं पर चर्चा की गई तथा इन्हें आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के संदर्भ में समझाने का प्रयास किया गया।
कार्यशाला में स्वामी महेश एवं डॉ. अनिल गुप्ता ने प्रतिभागियों को विभिन्न अवधारणाओं की जानकारी दी। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के सदस्य विवेक गनोदवाले, सचिव सूर्यप्रकाश शुक्ला तथा पावर कंपनीज़ के प्रबंध निदेशक एस.के. कटियार, राजेश कुमार शुक्ला एवं भीम सिंह कंवर विशेष रूप से उपस्थित रहे।
अपरा और परा विद्या का बताया अंतर
स्वामी महेश ने भारतीय ज्ञान परंपरा में वर्णित अपरा विद्या और परा विद्या की अवधारणा समझाई। उन्होंने कहा कि अपरा विद्या वह है, जिसे इंद्रियों के माध्यम से देखकर, पढ़कर और समझकर जाना जा सकता है, जबकि परा विद्या का संबंध सूक्ष्म एवं आंतरिक अनुभूति से माना गया है।
उन्होंने आत्मा, मन, शरीर की तंत्रिका प्रणाली और इंद्रियों के बीच समन्वय की पारंपरिक अवधारणा पर भी प्रकाश डाला। इसके साथ ही मानव शरीर से जुड़े पंचकोश—अन्नमय कोष, प्राणमय कोष, मनोमय कोष, विज्ञानमय कोष और आनंदमय कोष के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
षट्चक्र और आभामंडल पर हुई चर्चा
डॉ. अनिल गुप्ता ने मानव शरीर में ऊर्जा के संचार तथा भारतीय परंपरा में वर्णित षट्चक्र की अवधारणा पर जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में प्रत्येक व्यक्ति के आभामंडल तथा आंतरिक ऊर्जा और चेतना के विकास की चर्चा की गई है।
कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को भारतीय ज्ञान परंपरा में वर्णित शरीर, मन और चेतना से जुड़ी विभिन्न अवधारणाओं को समझने का अवसर मिला।
कार्यक्रम का संचालन उपमहाप्रबंधक (जनसंपर्क) गोविन्द पटेल ने किया, जबकि आयोग की संयुक्त निदेशक प्राची श्रीवास्तव ने अतिथियों का परिचय कराया।





