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अतुल, सुभाष, मानव, राजेंद्र के बाद अब पत्नी के टॉर्चर की भेंट चढ़ा  गौरव कुमार

उत्तरप्रदेश,संभल/अतुल सुभाष, मानव शर्मा और राजेंद्र पाल… और भी न जाने कितने ऐसे मामले हैं जहां पतियों ने पत्नियों की प्रताड़ना से तंग आकर मौत को गले लगा लिया. कुछ मामले को हाईलाइट हो जाते हैं, लेकिन कई ऐसे केस भी है जो सिर्फ थानों तक ही सीमित रहते हैं या फिर वहां तक भी नहीं पहुंच पाते.

पत्नी की यातनाओं से तंग आकर जब अतुल सुभाष ने अपनी जान दे दी तो उसके बाद कई मामले इसी तरह के लगातार सामने आने लगे. अब ऐसा ही एक और मामला सम्भल जिले से भी सामने आया है. यहां गौरव कुमार नामक शख्स ने पत्नी के अत्याचारों से निपटारा पाने के लिए मौत को चुन लिया.

एक और पति अपनी पत्नी के टॉर्चर की चढ़ गया भेंट 

जी हां, एक और पति अपनी पत्नी के टॉर्चर की भेंट चढ़ गया. आरोप है कि गौरव की पत्नी उसे मानसिक रूप से परेशान करती थी. वो शादी के बाद घर छोड़कर मायके चली गई थी. साथ तो रह नहीं रही थी, फिर भी पैसों की डिमांड वो गौरव से करती रहती थी. गौरव अगर उसे मना करता को वो उसे झूठे केस में धमकाने की धमकी देती. गौरव एक समय तक तो यह सब सहता रहा, उसे लगा कि शायद एक न एक दिन सब कुछ ठीक हो जाएगा. लेकिन वो कहते हैं न कि सब्र की भी एक सीमा होती है. जब पत्नी के टॉर्चर सहने की उसमें हिम्मत न रही तो गौरव ने सुसाइड कर लिया.

पुलिस ने पत्नी प्रिया, उसकी मां और भाई के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है

मंगलवार को गौरव ने आत्महत्या की. मरने से पहले वो एक सुसाइड नोट भी छोड़ गया, जिसमें उसने अपना दर्द बयां किया है. परिवार के अनुसार ऐंचोड़ा कम्बोह क्षेत्र के मौसमपुर गांव के गौरव कुमार ने रविवार को जहरीला पदार्थ खा लिया, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई. जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया. लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. वहीं, पुलिस ने बताया कि गौरव के पिता कृष्णपाल सिंह की शिकायत के आधार पर उसकी पत्नी प्रिया, उसकी मां और भाई के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है.

एक साल पहले हुई थी गौरव की शादी

पिता कृष्णपाल ने आरोप लगाया कि उनके बेटे ने एक साल पहले मुरादाबाद जिले के सोनकपुर के अलीनगर निवासी प्रिया से शादी की थी. इसके तुरंत बाद गौरव, उसकी पत्नी और उसके माता-पिता के बीच विवाद शुरू हो गया. उन्होंने दावा किया कि प्रिया ने आखिरकार अपना वैवाहिक घर छोड़ दिया और अपने माता-पिता के पास लौट आई. इसके बाद उसने गौरव से पैसे मांगे और मांगें पूरी न होने पर दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज कराने की धमकी दी. हालांकि, इस बीच सुलह के कई प्रयासों के बावजूद प्रिया ने घर लौटने से इनकार कर दिया. जिससे उनके बेटे को काफी मानसिक परेशानी हुई. घटना के दिन गौरव ने जहर खाने से पहले एक सुसाइड नोट लिखा था.

असमोली के सर्किल ऑफिसर (CO) कुलदीप कुमार ने कहा कि शुरुआती जांच से पता चलता है कि आत्महत्या घरेलू कलह का नतीजा थी. उन्होंने कहा कि प्रिया और दो अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है. हालांकि, सुसाइड नोट गौरव ने ही लिखा था या नहीं, इसको लेकर जांच की जा रही है.

मानव शर्मा सुसाइड केस

ये कोई पहला केस नहीं है. 27 फरवरी को आगरा के मानव शर्मा ने भी इसी तरह सुसाइड कर लिया था. आईटी कंपनी के मैनेजर मानव शर्मा ने आत्महत्या से पहले एक वीडियो बनाया था. मानव ने पत्नी निकिता शर्मा पर दूसरे मर्द से संबंध रखने के गंभीर आरोप लगाए थे. 28 फरवरी की सुबह यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. वीडियो देखते ही मानव की पत्नी निकिता पिता के साथ बाइक पर बैठ कर बहरन मोहल्ले से फरार हो गई थी. उसका मोबाइल भी ऑफ जा रहा है. फिलहाल उसकी तलाश जारी है.

राजेंद्र पाल सुसाइड केस

ठीक वैसा ही एक और मामला बरेली से भी सामने आया. यहां रविवार को एक बैंककर्मी राजेंद्र पाल ने जहर खाकर जीवनलीला समाप्त कर ली. बैंककर्मी की पत्नी पर उसे आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप लगा. मामला बिथरी चैनपुर थाना क्षेत्र का है. मृतक बैंककर्मी के भाई का आरोप है- भाभी के किसी गैर मर्द से अवैध संबंध थे, जिसके चलते भैया मानसिक रूप से परेशान थे. इसके अलावा भाभी के प्रेमी ने भी भैया को धमकाया था. बस भाभी की बेवफाई से दुखी होकर भैया ने सुसाइड कर लिया. मृतक की पत्नी और उसके प्रेमी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है.

अतुल सुभाष सुसाइड केस

बिहार के अतुल सुभाष ने भी तीन महीने पहले पत्नी निकिता सिंघानिया और ससुरालियों के टॉर्चर से परेशान होकर बेंगलुरु में आत्महत्या कर ली थी. उन्होंने 24 पन्नों का सुसाइड नोट छोड़ा था. साथ ही 90 मिनट का वीडियो भी बनाकर सोशल मीडिया पर डाला था. इस मामले में अतुल की पत्नी, सास और साले को अरेस्ट किया गया था. मामला अभी कोर्ट में चल रहा है.

संविधान में संशोधन की जरूरत

भारतीय संविधान में महिला उत्पीड़न पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कानून बनाए गए हैं लेकिन यही कानून कुछ महिलाओं के लिए पुरुषों को प्रताड़ित करने का हथियार बन गया है. छेड़छाड़, रेप और दहेज उत्पीड़न के फर्जी मामले दर्ज कराना आज आम बात हो गयी है. पुरुष वर्ग अच्छे से जानता है कि महिला सुरक्षा कानून के चलते थाना कचहरी में उनकी कोई सुनवाई नहीं होगी. यही वजह है कि कानून का भय दिखाकर ऐसी महिलाएं पुरुषों का जीना मुहाल कर देती हैं कि उन्हें खुदकुशी करने के अलावा और कोई दूसरा विकल्प नजर नहीं आता. ऐसे में संविधान में संशोधन की आवश्यकता महसूस की जा रही है ताकि पुरुषों को महिलाओं की प्रताड़ना से बचाया जा सके.

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