वर्ष “2026”हम सब के लिए मंगलमय हो

वक्त की रफ्तार, वर्ष “२०२६”
आ पहुंचा हम सब के द्वार।
हां जनाब, आप देखें जिंदगी में, वक्त की रफ्तार।
चरैवत –चरैवत का संदेश देती रही, और चलती रही बेपरवाह ।
मैं, वर्ष “२०२५” का कैलेंडर पलटता रहा, यूंही बार बार।
वक्त की नज़ाकत भी बड़ी अजीब होती है,
अंधकार की घोर निशा में एक की विदाई और, दूसरे का आगमन होती है।
एक की आंखों में आंसू लिए, वर्ष “२०२५” यह कहकर चली जाती है –
अब कभी नहीं आऊंगी, तेरे द्वार।
ठीक उसी समय वर्ष “२०२६” का आगमन, मुस्कान बिखेरती पहुंच गई हम सबके द्वार l
इस साल के आखिरी महीने में, ज़हन में कई सवाल आ गए।
और सवालों का जवाब पाने को, कमरे में जाकर बैठ गया।
छत को निहारा, जवाब मिला – ऊंची सोच रखो।
पंखे ने कहा! ठंडे से रहो।
घड़ी ने कहा! हर मिनट कीमती है।
शीशे ने कहा! कुछ करने से पहले, अपने अंदर झांक तो ले।
खिड़की ने कहा! खोलो और दुनियां को देख तो ले।
कैलेंडर ने कहा! हमेशा अप टू डेट रहो।
दरवाजे ने कहा! अपनी मंज़िल पाने के लिए, पूरी तैयारी कर लो।
और उम्मीद का दामन कभी नहीं छोड़ो,
इस उम्मीद से कि अगले साल का हिसाब करने बैठूं तो शायद,
गम कम, खुशियां ज्यादा हो।
वर्ष २०२६, हम सब का मंगलमय हो।




