छत्तीसगढ़

युक्तियुक्तकरण से होगी शिक्षा व्यवस्था बेहतर और समावेशी – कलेक्टर

कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने शालाओं और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण के संबंध में ली प्रेसवार्ता

युक्तियुक्तकरण से सुधरेगा छात्र-शिक्षक अनुपात, बढ़ेगी शिक्षा की गुणवत्ता

जांजगीर-चांपा/ कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने आज कलेक्टोरेट सभाकक्ष में युक्तियुक्तकरण के संबंध में प्रेसवार्ता ली। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ गोकुल रावटे, अपर कलेक्टर ज्ञानेन्द्र सिंह ठाकुर, एसडीएम जांजगीर सुब्रत प्रधान, जिला शिक्षा अधिकारी अश्वनी भारद्वाज, सहायक संचालक जनसंपर्क  जरीफ खान, सहायक प्रचार-प्रसार अधिकारी  देवेन्द्र कुमार यादव सहित मीडिया संस्थानो के प्रतिनिधिगण उपस्थित थे।
कलेक्टर ने कहा कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर और समावेशी बनाने के लिए शालाओं और शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है। नगरीय इलाकों में छात्रों की तुलना से अधिक शिक्षक पदस्थ हैं, जबकि ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों की शालाओं में स्थिति इसके विपरीत है। वहां शिक्षकों की कमी है, जिसके चलते शैक्षिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं और छात्र-छात्राओं का परीक्षा परिणाम भी प्रभावित हो रहा है। इस स्थिति को सुधारने के उद्देश्य से ही प्रदेश सरकार द्वारा युक्तियुक्तकरण का कदम उठाया गया है। इससे जिन शालाओं में शिक्षक की जरूरत है, वहां शिक्षक उपलब्ध होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में गणित, रसायन, भौतिकी और जीव विज्ञान जैसे विषयों के विषय-विशेषज्ञ उपलब्ध होंगे। बच्चों को अच्छी शिक्षा, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। कुल मिलाकर युक्तियुक्तकरण के माध्यम से छात्र-शिक्षक का अनुपात स्कूलों में संतुलित हो, यह सुनिश्चित किया जा रहा है। यह युक्तियुक्तकरण कोई कटौती नहीं, बल्कि गुणवत्ता और समानता की दिशा में बड़ा कदम है।
कलेक्टर ने कहा कि जिले के बलौदा विकासखंड अंतर्गत शासकीय प्राथमिक बालपुर में 109 छात्राओं पर 1 शिक्षक थे। अब युक्तियुक्तकरण से वहां 01 प्रधान पाठक और 03 शिक्षक होंगे। इसी तरह पामगढ़ ब्लॉक के शासकीय प्राथमिक शाला डुड़गा में भी 129 छात्रों पर केवल 1 प्रधान पाठक थे। अब युक्तियुक्तकरण से वहां 01 प्रधान पाठक और 03 शिक्षक होंगे। वहीं दूसरी ओर विकासखंड बलौदा अंतर्गत शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला पिसौद में 84 विद्यार्थियों की तुलना में 10 शिक्षक कार्यरत थे जो निर्धारित संख्या से कहीं अधिक है।
कलेक्टर ने बताया कि जिले में 1 प्राथमिक शालाएं शिक्षकविहीन एवं 67 शालाएं एकल शिक्षकीय थे। जिले में प्राथमिक शालाओं में 434 एवं पूर्व माध्यमिक शालाओं में 196 शिक्षक ही अतिशेष थे। अतिशेष शिक्षकों का पुनः समायोजन कर एकल शिक्षकीय और शिक्षक विहीन विद्यालयों में पदस्थापना की जा रही है। पूरे राज्य में मात्र 241 स्कूलों का समायोजन किया जा रहा है। हमारे जिले में 22 शालाओं का समायोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिले में 1339 स्कूलों में से 1317 स्कूल यथावत संचालित होंगे। सिर्फ उन्हीं स्कूलों का समायोजन किया जा रहा है, जिनमें छात्रों की संख्या बहुत कम है और पास में बेहतर विकल्प मौजूद हैं। एक ही परिसर में स्थित विद्यालयों को समाहित कर क्लस्टर मॉडल विकसित किया जा रहा है। युक्तियुक्तकरण से शिक्षक विहीन विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता के साथ ही एक ही परिसर में विद्यालय होने से आधारभूत संरचना मजबूत होगी। शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के दिशा-निर्देशों के अनुरूप शिक्षकों और शालाओं का युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है। उन्होंने  कहा कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी विद्यार्थी की पढ़ाई प्रभावित न हो। युक्तियुक्तकरण से बच्चों के ड्रॉपआउट दर में कमी आएगी तथा अच्छी बिल्डिंग, लैब, लाईब्रेरी जैसी सुविधाएं एक ही जगह देना आसान होगा।

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