कोरबाछत्तीसगढ़

जल संसाधन विभाग की 25 वर्षों में विकास की धारा

हर खेत तक पहुंचा पानी हर किसानों के चेहरों में आई मुस्कान

पानी से समृद्धि तक, बढ़ी सिंचाई क्षमता और सशक्त हुआ ग्रामीण विकास का आधार

कोरबा 29 अक्टूबर 2025/छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की रजत जयंती वर्ष समूचे प्रदेश के लिए गर्व और उपलब्धियों के उत्सव का अवसर लेकर आया है। शुरुआती दौर में राज्य ने अपनी ऐतिहासिक यात्रा आरंभ की थी, तब विकास की राह अनेक चुनौतियों से घिरी हुई थी। सीमित संसाधन एवं अधोसंरचना की कमी के बीच राज्य ने दृढ़ संकल्प, जनसहभागिता और समर्पित नेतृत्व के बल पर निरंतर आगे बढ़ने का संकल्प लिया। आज, 25 वर्षों के इस गौरवशाली सफर में छत्तीसगढ़ ने उद्योग, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, स्वच्छता, ग्रामीण विकास और जल संसाधन जैसे अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति कर देश के विकसित और उन्नतिशील राज्यों की श्रेणी में अपना स्थान सशक्त किया है। यह रजत जयंती वर्ष केवल बीते वर्षों की उपलब्धियों का स्मरण भर नहीं, बल्कि एक सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की दिशा में नई ऊर्जा का प्रतीक है।
25 वर्षीय सफर में जल संसाधन विभाग का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। जल ही जीवन और कृषि का आधार है, और छत्तीसगढ़ जैसे कृषिप्रधान राज्य में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ साबित हुआ है। कोरबा जिला, जो अपनी भौगोलिक विविधता और औद्योगिक पहचान के लिए जाना जाता है, यहाँ जल संसाधन विभाग ने वर्ष 2000 से लेकर 2025 तक अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की है। वर्ष 2000 में जब छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना हुई, उस समय कोरबा जिले में सिंचाई की स्थिति बहुत सीमित थी। जिनमें जलाशय, व्यपवर्तन और उद्दवहन जैसी योजनाएँ सम्मिलित थीं। इन योजनाओं के माध्यम से खरीफ और रबी दोनों मौसमों में मिलाकर लगभग दस हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा रही थी। ग्रामीण अंचलों में वर्षा पर निर्भर खेती प्रचलित थी और सीमित सिंचाई व्यवस्था के कारण किसानों को फसलों की उत्पादकता में कठिनाइयाँ आती थीं।
राज्य गठन के पश्चात सरकार ने जल संसाधन के विकास को अपनी प्राथमिकता में रखा। ग्रामीण क्षेत्रों में जल भंडारण और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए कई योजनाएँ लागू की गईं। जलाशयों के निर्माण, नहरों के जीर्णोद्धार, व्यपवर्तन परियोजनाओं के विस्तार तथा एनिकट निर्माण जैसे कार्यों को निरंतरता से आगे बढ़ाया गया। इन योजनाओं ने न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा दिया, बल्कि जल के समान वितरण को भी सुनिश्चित किया। आज, जब राज्य अपनी रजत जयंती मना रहा है, कोरबा जिले का जल संसाधन विभाग इस बात का उदाहरण बन चुका है कि योजनाबद्ध प्रयास और कार्यशैली किस प्रकार जनहित में ठोस परिणाम दे सकते हैं। इनमें जलाशय, व्यपवर्तन और एनिकट योजनाएँ प्रमुख हैं। इन सभी योजनाओं के माध्यम से अब खरीफ और रबी दोनों मौसमों में मिलाकर लगभग साढ़े सोलह हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो रही है। यह आंकड़ा वर्ष 2000 की तुलना में 6071 हेक्टेयर की वृद्धि को दर्शाता है, जो विभाग की निष्ठा और राज्य शासन की दूरदर्शी नीतियों का परिणाम है।
वर्ष 2000 में कोरबा जिले में जलाशयों की संख्या मात्र 31 थी, जिनसे खरीफ में लगभग 7365 हेक्टेयर और रबी में 294 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती थी। आज यही संख्या बढ़कर 40 जलाशयों तक पहुँच चुकी है, जिनसे खरीफ में 9135 हेक्टेयर और रबी में 326 हेक्टेयर भूमि सिंचित हो रही है। व्यपवर्तन परियोजनाओं की संख्या भी इस अवधि में 7 से बढ़कर 14 हो गई है, जिससे खरीफ और रबी दोनों मौसमों में लगभग 5790 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो रही है। इसी प्रकार, वर्ष 2000 में जिले में एक भी एनिकट योजना नहीं थी, जबकि अब 23 एनिकट योजनाएँ निर्मित हो चुकी हैं, जिनसे लगभग 1256 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा प्राप्त हो रही है।
इन आँकड़ों से स्पष्ट है कि पिछले 25 वर्षों में जिले की सिंचाई क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। अकेले जलाशयों से 1802 हेक्टेयर, व्यपवर्तन परियोजनाओं से 3013 हेक्टेयर और एनिकट योजनाओं से 1256 हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षेत्र विकसित हुआ है। इससे न केवल खेती का रकबा बढ़ा है, बल्कि किसानों के लिए नई संभावनाएँ भी खुली हैं। जहाँ पहले केवल खरीफ फसलें बोई जाती थीं, वहीं अब रबी और ग्रीष्मकालीन फसलों की खेती भी संभव हो सकी है। जल संसाधन विभाग द्वारा संचालित योजनाओं ने कोरबा के किसानों को आत्मनिर्भरता की राह पर अग्रसर किया है। पहले जहाँ वर्षा पर निर्भरता के कारण फसलों की पैदावार अस्थिर रहती थी, वहीं अब पर्याप्त जल उपलब्धता से उत्पादन में स्थायित्व आया है। इससे किसानों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है और ग्रामीण जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव देखा गया है। गाँवों में कृषि आधारित रोजगार सृजन बढ़ा है तथा जल संरक्षण की संस्कृति विकसित हुई है।
इन उपलब्धियों के पीछे राज्य शासन की दूरदर्शी नीतियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। बीते वर्षों में शासन ने कई पहलें लागू कीं। इन योजनाओं ने न केवल जल संरक्षण को प्रोत्साहित किया बल्कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से जल उपयोग दक्षता भी बढ़ाई। पाइपलाइन आधारित वितरण प्रणाली और सौर ऊर्जा संचालित पंपों के माध्यम से पानी की आपूर्ति को अधिक सुगम बनाया गया है। विभाग ने जल संसाधन प्रबंधन में पारंपरिक अनुभव और आधुनिक तकनीक का संतुलित उपयोग किया है। जिन क्षेत्रों में जल की कमी थी, वहाँ जल पुनर्भरण के उपाय अपनाए गए हैं। तालाबों और नहरों का गहरीकरण कर उनकी भंडारण क्षमता में वृद्धि की गई है। इससे भूजल स्तर में भी सुधार हुआ है। इसके साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के प्रति जनजागरण अभियान चलाए गए, जिससे लोगों में जल के महत्व और इसके विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ी है।
राज्य शासन की यह सोच रही है कि हर खेत तक पानी पहुँचे और हर किसान को सिंचाई की सुविधा मिले। इसी दिशा में कोरबा जिले में विभाग ने निरंतर कार्य किया है। अब जिले के अनेक ग्रामों में किसानों को वर्षभर सिंचाई सुविधा उपलब्ध है, जिससे दोहरी फसलें लेने की परंपरा विकसित हो रही है। यह परिवर्तन केवल कृषि उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है। जल संसाधन के बेहतर प्रबंधन ने किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया है और कृषि को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित किया है। राज्य स्थापना के आरंभिक वर्षों में जहाँ विभाग के पास सीमित संसाधन और साधन थे, वहीं अब विभाग तकनीकी दृष्टि से सशक्त और योजनाबद्ध रूप में कार्य कर रहा है।
आज जब राज्य अपने 25 वर्षों की उपलब्धियों पर गर्व कर रहा है, तब जल संसाधन विभाग, कोरबा की यह यात्रा प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करती है। यह केवल आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि उस सामूहिक प्रयास की गाथा है जिसमें सरकार, विभागीय कर्मचारी और किसान ने मिलकर विकास को साकार किया। यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि योजनाबद्ध विकास, जनसहभागिता और तकनीकी नवाचार के संगम से किसी भी क्षेत्र में समृद्धि लाई जा सकती है। रजत जयंती वर्ष में जल संसाधन विभाग, कोरबा का यह योगदान न केवल जिले के लिए बल्कि पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय है। विभाग ने यह साबित किया है कि जल का प्रबंधन केवल संसाधन नहीं, बल्कि समाज की समृद्धि का माध्यम है। 25 वर्षों की यह विकास यात्रा छत्तीसगढ़ के उज्जवल भविष्य की नींव को और मजबूत करती है, जहाँ हर खेत में हरियाली और हर किसान के चेहरे पर खुशहाली का उजाला है।

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