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हीरा मोती की जोड़ी ने खींचा श्रीजी का रथ, 7 फेरी के साथ संपन्न हुआ महामहोत्सव

मध्यप्रदेश । हम यहां अशोक नगर पुरानी गल्ला मण्डी  के पंचकल्याणक प्रतिष्ठा स्थल पर संपन्न हुए भव्य आयोजन के बारे में बता रहे हैं,यहां 33 साल के लंबे अंतराल के बाद फिर से गजरथ फेरी का ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। सुबह की पहली किरण के साथ ही मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने आयोजन स्थल पर पहुंचे और प्रतिष्ठा की क्रियाएं संपन्न कराईं। वह दृश्य और भी अदभुत था जब मुनिश्री ने संघ सहित स्वयं के द्वारा प्रतिष्ठित की गयीं प्रतिमाओं को नमोस्तु किया।

08:01 AM – भगवान को मोक्ष हुआ, उसके तुरंत बाद अग्निकुमार देवों ने नख‑बालों का संस्कार किया। इंद्र‑इंद्राणियों ने उस भभूत को सिर पर धारण किया, और मुनिश्री ने एक साथ 200 जिनबिंबों में प्राण डालते ही गुरुजी के सूरीमंत्र पर जिन‑बिंब बोलने को तैयार हो गए।

विश्वशांति महायज्ञ – बाल ब्रह्मचारी प्रदीप भैया सुयस ने 3 000 से अधिक हवनकुंडों में घी, चंदन, धूप, कपूर आदि आठ वस्तुओं से आहुति दिलाई। धुएँ के गुबार ने आसमान को सुगंधित कर दिया, मानो पूरा विश्व शान्तिमय हो गया।

दोपहर 1 बजे – श्री जी को रथ पर बैठाकर भव्य फेरी शुरू हुई। प्रथम मुख्य रथ को वही हीरा‑मोती नाम के हाथी खींच रहे थे, जो 33 साल पहले भी इस महोत्सव में रथ खींचने आए थे। रथ के साथ 5000 इंद्र‑इंद्राणी, सौधर्म इंद्र, कुबेर इंद्र और अन्य देवता चल रहे थे। पीछे रजतरथ, फिर वृषभ रथ, और साथ में डीजे, ढोल‑नगाड़े, बैंड बाजे गूँज रहे थे।

7 फेरी पूरी हुईं, और इस भव्य दृश्य को देखने के लिए विधायक हरिबाबू राय, नपाध्यक्ष नीरज मानोरिया सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और हजारों जैन‑अजैन श्रद्धालु उपस्थित हुए।

विशेष सम्मान – इस महा आयोजन में भगवान के माता‑पिता श्री राकेश‑श्रीमती अनीता जैन अमरोद, सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य सुमत अखाई, कुबेर इंद्र शैलेंद्र दद्दा, यज्ञनायक पदम कुमार, सौरभ कुमार बांझल, भरत चक्रवर्ती संजीव जैन, बाहुबलि नीलेश जैन, राजा सोम सालू भारत, राजा श्रेयांस रिंकु भारत को मिला। ध्वजारोहण विनोद जैन (राजू मेडिकल) ने किया। सारथी बनने का सौभाग्य नितिन जी रतन कटपीस परिवार, मनोज जी भोला स्टुडियो परिवार को मिला।

सिंघई की उपाधि – यज्ञनायक पदम कुमार- सौरभ कुमार बांझल को “सिंघई” की उपाधि दी गई, जिसकी घोषणा जैन समाज अध्यक्ष राकेश कांसल ने मंच से की। मुनिश्री ने बुंदेलखण्ड की इस अद्भुत परंपरा को सराहा, जहाँ पंचकल्याणक कराने वाले यज्ञनायक को यह सम्मान मिलता है।

यहाँ का माहौल धार्मिक उत्साह, संगीत और रंग‑बिरंगी फेरी से भरपूर रहा। सभी श्रद्धालु इस ऐतिहासिक गजरथ फेरी को यादगार बना रहे थे।

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