कोरबाछत्तीसगढ़

हमें मानवीय गरिमा से जीवन जीने का अधिकार – प्रधान जिला न्यायाधीश कोरबा

कोरबा। दिनांक 26 नवम्बर 2024 को संविधान दिवस के अवसर पर विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन शासकीय ई.व्ही. पी.जी. महाविद्यालय कोरबा में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा के द्वारा किया गया। उक्त अवसर पर मुख्य अतिथि  सत्येन्द्र कुमार साहू, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं  अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा के द्वारा अपने उद्बोधन में कहा गया कि इस सभा में सबसे अधिक छात्राएं अधिक संख्या में उपस्थित है आज से 20 वर्षो पूर्व इतने छात्राएं उपस्थित नहीं हो पाते थे। आज यह  सभी संभव हो पाया है हमारे संविधान के कारण। संविधान की उद्देशिका में समस्त नागरिकों को सामजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक न्याय, विचार अभिव्यक्ति, धर्म, उपासना की स्वतंत्रता, निष्ठा एवं अवसर की समता प्रदान किया गया है। सभी व्यक्ति को गरिमा पूर्ण जीवन यापन करने का अधिकार दिया गया है। यह हमारा मानव अधिकार है। व्यक्ति की गरिमा के संबंध में संक्षिप्त उदाहरण देते हुये कहा गया कि कोई भी मनुष्य को हम दुखी अवस्था में देखते है तो हमें तकलीफ होती है। हम सब मनुष्य है। हमें मानवीय गरिमा से जीवन जीने का अधिकार है। लड़कियों को, गरीबों को आगे बढाना है बहुत से योजनाओं का लाभ हमें संविधान के द्वारा प्रदाय किया गया है। संविधान हमारे जीवन के प्रत्येक अंग से जुड़ा हुआ है। हमें हमेशा लीगल व सही रास्ता में चलना चाहिये। विधि है तो उपचार भी होगा। कानूनी उपचार लेना कठिन कार्य है। ये सभी हमारे संविधान में प्रावधनित है।
जयदीप गर्ग, विशेष न्यायाधीश, कोरबा के द्वारा बताया गया कि दिनांक 26 नवम्ब 1949 को संविधान सभा ने इस भारत के संविधान को पास किया गया था। 26 जनवरी 1950 को प्रावधानित हुआ है। संविधान सभी के लिये समान विधान है। हमारा संविधान हमें अनेक अधिकारोें के साथ कर्तव्य भी बताता है। सभी कानून संविधान से निकलते है कोई कानून बनता है और वह संविधान के अनुरूप नहीं है तो न्यायपालिका, उच्चतम न्यायालय उसे निरस्त कर देता है। अधिकार एवं कर्तव्य एक सिक्के के दो पहलू है। हम सभी को अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्य का पालन करना आवश्यक है।
कु0 डिम्पल, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा (छ0ग0) के द्वारा संविधान दिवस की बधाईयां देते हुये बताया गया कि संविधान नियमों और कानूनों का एक समूह है जो किसी देश के संचालन और नियंत्रण को विनियमित करता है। संविधान कर्तव्यों के साथ-साथ मौलिक अधिकारों, राज्य के नीति निर्देशक तत्व और नागरिक जिम्मेदारियों को भी परिभाषित करता है। संविधान की प्रस्तावना में ही संविधान का सार है। कानून गरीब या अमीर में कोई अंतर नहीं रखता है। कानून सभी के लिए समान है। कानून परिस्थितियों में परिवर्तन के आधार पर समाज के नागरिकों की सेवा हेतु समय पर संशोधित किया जाता है।
आशुतोष पाण्डेय, आयुक्त नगर पालिक निगम विशिष्ट अतिथि के द्वारा अपने उद्बोधन में कहा गया कि छात्रों को अनुशासन के मामले में संगठित किया गया है। संविधान को हमारे संविधान सभा में पारित किया गया था। यह दिन महत्वपूर्ण है क्योकि इस दिन हमने स्वतंत्रता पूर्ण रूप से पायी थी। कहा जाता है कि न्याय का एक घंटा प्रार्थना के 70 घंटा से ज्यादा मूलयवान है। इस वाक्य से समझ सकते हैं कि हमारी न्यायिक प्रणाली कितनी महत्वपूर्ण है। भारत का संविधान में विभिन्न देशों के अच्छे-अच्छे अंश को लिया गया है। इसे एक वृहद् संविधान बनाया गया है जो कि विश्व का सबसे बड़ा संविधान है। शहर की व्यवस्था को चलाने के लिये बाध्य होता है। नगल पालिक के नियमों का पालन करना हमारा दायित्व है। कानून से ना कोई ऊपर है और ना ही कोई नीचे है अर्थात कानून सबके लिए समान है और यह लिखित रूप में है।
आर.बी. शर्मा प्राचार्य, शासकीय ई.व्ही. पी.जी. महाविद्यालय कोरबा के द्वारा उक्त कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि का आभार प्रदर्शन किया गया। उक्त कार्यक्रम में गणेश कुलदीप, अध्यक्ष, जिला अधिवक्ता संघ कोरबा, नूतन सिंह, सचिव, जिला अधिवक्ता संघ कोरबा एवं डाॅ. एन.के. सिंह तथा उपायुक्त नगर पालिक निगम कोरबा उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में संविधान की प्रस्तावना का वाचन किया गया।

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