चैंबर ऑफ़ कॉमर्स ने टैक्सपेयर के लिए कार्यशाला रखी
कोरबा। राष्ट्र निर्माण में सबसे बड़ी भूमिका वह वर्ग निभा रहा है जो विभिन्न प्रकार के व्यवसाय से जुड़कर कर का भुगतान करता है। अलग-अलग कारण से कर दाताओ के इनकम टैक्स रिटर्न से संबंधित मामले या तो लंबित है या विवाद में है। इन्हें सुलझाने के लिए विभाग ने विवाद से विश्वास 2024 स्कीम लॉन्च की है। चैंबर ऑफ़ कॉमर्स कोरबा के द्वारा लोगों को मार्गदर्शन देने के उद्देश्य से कार्यशाला का आयोजन किया गया। वरिष्ठ अधिकारी इसमें मार्गदर्शन की भूमिका में शामिल हुए।
मुख्य आयकर आयुक्त, रायपुर, अपर्णा करण और प्रधान आयकर आयुक्त, रायपुर प्रदीप हेडाउ ने विवाद से विशवास 2024 योजना पर जागरूकता बढ़ाने और करदाताओं की धोखाधड़ी प्रथाओं को रोकने के लिए कोरबा क्षेत्र में दो महत्वपूर्ण सेमिनार आयोजित किए हैं। कानून के विरुद्ध अपात्र कटौतियों का दावा करके अनियमित रिफंड का दावा कर रहे हैं।
विवाद से विश्वास योजना पर आउटरीच कार्यक्रम चैंबर ऑफ कॉमर्स, टैक्स बार एसोसिएशन और सीए एसोसिएशन के सहयोग से आयोजित किया गया। इन संगठनों के कई लोगों ने आउटरीच कार्यक्रम में भाग लिया और मुकदमेबाजी को कम करने की योजना लाने के लिए आयकर विभाग की सराहना की।
अपर्णा करण, मदान और प्रदीप हेडाऊ ने करदाताओं को सूचित किया है कि VsVs-2024 योजना कई करदाताओं को मदद करती है क्योंकि जो भी करदाता इस योजना का विकल्प चुनते हैं, उनके लिए ब्याज माफ कर दिया जाएगा, अभियोजन और दंड से छूट उपलब्ध होगी।
वहीं एसईसीएल कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित सेमिनार के दौरान आयकर अधिकारियों ने उन सभी करदाताओं को चेतावनी दी है जो अवैध तरीके से काम करने वाले एजेंटों के साथ मिलकर अनियमित रिफंड का दावा करने की धोखाधड़ी कर रहे हैं। आयकर अधिकारियों ने आगाह किया है कि इस प्रकार की धोखाधड़ी वाली गतिविधियों में लिप्त सभी लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने और जुर्माना लगाने जैसी गंभीर कार्रवाई शुरू की जाएगी। आयकर विभाग ने कहां है कि लंबित मामलों का समाधान करना उनका मुख्य उद्देश्य है और योजना इसी परिपेक्ष में शुरू की गई है। कोरबा में आयोजित कार्यशाला में जिला चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष योगेश जैन, विनोद अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में टैक्स पेयर, टैक्स बार संगठन के सदस्य उपस्थित थे।
![]() | ![]() | ![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |









































