सफलता की कहानी,किशन कुमार बंसल : मेहनत, विश्वास और पारदर्शी खरीदी व्यवस्था से बनी प्रगति की राह
एमसीबी/02 दिसम्बर 2025/ जिले के चैनपुर निवासी किसान किशन कुमार बंसल आज क्षेत्र के उन किसानों में गिने जाते हैं जो अपनी मेहनत और समझदारी से खेती को आत्मनिर्भरता की दिशा में ले जा रहे हैं। खरीफ वर्ष 2025-26 की धान खरीदी में उन्होंने 60 क्विंटल धान उपार्जन केंद्र में बेचकर न केवल प्रदेश की किसान-केंद्रित व्यवस्था पर विश्वास जताया, बल्कि यह भी साबित किया कि सही नीतियाँ और पारदर्शी प्रक्रियाएँ किसानों की जिंदगी बदल सकती हैं।
चुनौतियों से आगे बढ़ने का सफर– किशन कुमार बंसल बताते हैं कि कुछ साल पहले तक उन्हें मंडी में भीड़, लंबी प्रतीक्षा, तौलने में त्रुटियों और भुगतान में देरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। खेती-किसानी की व्यवस्था को संभालना मुश्किल होता जा रहा था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। पिछले वर्ष पहली बार उन्होंने डिजिटल टोकन प्रणाली के जरिए धान बेचा और समय पर भुगतान मिलने से उनमें नया आत्मविश्वास आया। इसी लाभ का उपयोग उन्होंने अपने खेतों में सुधार, उपकरणों की मरम्मत और बच्चों की शिक्षा में किया।
आधुनिक खरीदी व्यवस्था ने बदली तस्वीर- इस वर्ष जब राज्य सरकार ने किसानों के हित में बड़े निर्णय लिए- प्रति एकड़ 21 क्विंटल स्वीकृति सीमा 3100 प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य सुविधाजनक और पारदर्शी डिजिटल प्रक्रिया आदि। किशन कुमार बंसल जैसे किसानों के लिए यह बदलाव जीवन में नई उम्मीद लेकर आया। वे बताते हैं-“मंडी में बरदाना, पीने के पानी, तौल मशीन, धान मापने की मशीन सबकी व्यवस्था बेहतरीन है। किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती। सब कुछ तेज और पारदर्शी है।”
परिवार और खेती दोनों में आया सुधार– पिछले वर्ष धान विक्रय से मिली राशि का उपयोग उन्होंने- खेती में सुधार बेहतर बीज और खाद का प्रबंधन बच्चों की पढ़ाई जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में किया। इस वर्ष भी उन्हें विश्वास है कि मिलने वाला समर्थन मूल्य उनकी खेती को और मजबूत करेगा और परिवार को आर्थिक संबल देगा।
नेतृत्व पर भरोसे की नई कहानी- किशन कुमार बंसल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्णयों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहते हैं-“सरकार ने किसानों को वास्तविक राहत दी है। खरीदी प्रक्रिया सरल, सुविधाजनक और समय पर भुगतान वाली है। यह हर किसान के लिए बड़ी मदद है।”
संदेश– किशन कुमार बंसल की कहानी बताती है कि- जब किसान को सही मूल्य, सही समय पर मिलता है और व्यवस्था पारदर्शी हो, तो उसका जीवन बदल सकता है। आत्मविश्वास बढ़ता है और किसान नई उम्मीद के साथ खेती में नवाचार कर पाता है। उनकी यह यात्रा न केवल व्यक्तिगत प्रगति की कहानी है, बल्कि जिले के हजारों किसानों के लिए प्रेरणा भी है।
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