
पी.एम. विश्वकर्मा योजना ने हुनर को दिलाई नई पहचान
कोरबा, 14 जनवरी 2026/जिले के रामकुमार प्रजापति वर्षों से अपने पारंपरिक कुम्हार व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। मिट्टी को आकार देने की कला उनके परिवार की धरोहर है, लेकिन बदलते समय के साथ आधुनिक तकनीक और संसाधनों की कमी उनके कार्य को सीमित कर रही थी। शासन की पी.एम. विश्वकर्मा योजना ने उनके हुनर को नया आयाम और उनके जीवन को नई दिशा दी।
लाइवलीहुड कॉलेज, कोरबा में कुम्हार ट्रेड का प्रशिक्षण उनके लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। यहां रामकुमार ने इलेक्ट्रॉनिक चाक का उपयोग करना सीखा, जिससे मिट्टी के विभिन्न प्रकार के सुंदर और टिकाऊ पात्र बनाना उनके लिए अधिक सरल और आकर्षक हो गया। आधुनिक तकनीक के उपयोग ने उनके कौशल में गति, गुणवत्ता और डिजाइन की विविधता को बढ़ाया।
प्रशिक्षण अवधि के दौरान शासन द्वारा प्रदान किए गए चार हजार रुपये के स्टाइफंड ने उन्हें आर्थिक सहारा दिया। इसके साथ ही बिना गारंटर एक लाख रुपये तक का लोन मिलना उनके व्यवसाय के विस्तार के लिए संजीवनी साबित हुआ। इस सहायता से उन्होंने आवश्यक उपकरण जुटाए और अब पाली क्षेत्र के बाजारों में नियमित रूप से अपनी दुकान लगाकर अपनी रोज़ी-रोटी कमा रहे हैं।
आज रामकुमार प्रजापति अपने पारंपरिक पेशे को आधुनिक तकनीक से जोड़कर न सिर्फ आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि पुरातन कला को नया स्वरूप देकर लोगों तक पहुंचा रहे हैं। उनका प्रयास इस बात का प्रमाण है कि सही प्रशिक्षण और सरकारी सहयोग से परंपरा को भी समृद्ध भविष्य दिया जा सकता है।
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