
अम्बिकापुर , 31 मार्च, 2026/ ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ के प्रथम ऐतिहासिक संस्करण में कर्नाटक की बेटी मनीषा जोंस सिद्दी ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए कुश्ती के 76kg भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया है। अभावों के बीच पली-बढ़ी मनीषा की यह जीत केवल एक पदक नहीं, बल्कि उनके वर्षों के कठिन परिश्रम और अटूट संकल्प की विजय है।
पिता के निधन के बाद माँ बनीं संबल
मनीषा का खेल जीवन चुनौतियों से भरा रहा है। उन्होंने बताया कि जब वह पाँचवीं कक्षा में थीं, तभी उनके पिता का देहांत हो गया था। इसके बावजूद, उनकी माँ ने हार नहीं मानी और अकेले दिन-रात मेहनत करके मनीषा के सपनों को पंख दिए। पूर्व में कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सिल्वर और ब्रोंज मेडल जीत चुकीं मनीषा के करियर का यह पहला गोल्ड मेडल है।
स्पोर्ट्स हॉस्टल और परिवार का मिला साथ
अपनी सफलता को साझा करते हुए मनीषा ने कर्नाटक के डिवाइस स्पोर्ट्स हॉस्टल की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, “हॉस्टल के कोच और साथी खिलाड़ियों ने मुझे हमेशा प्रेरित किया। मेरा बड़ा भाई मेरा मार्गदर्शक रहा है, वहीं छोटा भाई, जो खुद एक राज्य स्तरीय एथलीट है, वह मेरी सबसे बड़ी हिम्मत है।
ट्राइबल गेम्स : एक नई पहचान का मंच
मनीषा ने केंद्र सरकार और आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ जैसे मंच से जनजातीय समुदाय के बच्चों को अपनी विशेष पहचान के साथ आगे बढ़ने का मौका मिला है। उन्होंने यहाँ की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा मैच के दौरान सुरक्षा, भोजन और यातायात की व्यवस्था बेहतरीन थी। छत्तीसगढ़ के लोगों का व्यवहार और यहाँ का माहौल खिलाड़ियों के लिए अत्यंत सुखद है।
लक्ष्य : अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराना
स्वर्ण पदक की चमक के साथ मनीषा की निगाहें अब भविष्य की बड़ी चुनौतियों पर हैं। छत्तीसगढ़ की धरती पर मिली इस सफलता से उत्साहित मनीषा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी में जुटी हैं। उनका अंतिम लक्ष्य विश्व पटल पर स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाना है।
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