
कोरबा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार देशवासियों से ईंधन बचाने, पर्यावरण संरक्षण और अनावश्यक संसाधनों के उपयोग से बचने की अपील कर रहे हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुखिया विष्णुदेव साय सहित कई नेताओं की कार्यशैली उनकी इस अपील को खुली चुनौती देती नजर आ रही है।देखें वीडियो
राजनीतिक कार्यक्रमों और दौरों में नेताओं के काफिलों में दर्जनों गाड़ियां दौड़ रही हैं। कई जगह नेता घंटों तक खड़ी गाड़ियों में एसी चलाकर बैठे रहते हैं, जिससे हजारों लीटर ईंधन बेवजह फूंका जा रहा है। एक तरफ आम जनता महंगे पेट्रोल-डीजल की मार झेल रही है, दूसरी तरफ जनप्रतिनिधियों की यह शाही व्यवस्था लोगों में नाराजगी पैदा कर रही है।
नेताओं के मंचों से पर्यावरण बचाने और सादगी अपनाने के भाषण जरूर सुनाई देते हैं, लेकिन जमीन पर तस्वीर बिल्कुल उलट नजर आती है। जनता सवाल उठा रही है कि जब देश का प्रधानमंत्री खुद ऊर्जा बचत का संदेश दे रहे हैं, तब आखिर उनके पार्टी के ही नेता उस संदेश को गंभीरता से क्यों नहीं ले रहे?
लोगों का कहना है कि यदि नेताओं के काफिलों में वाहनों की संख्या सीमित की जाए और अनावश्यक एसी व गाड़ियों के इस्तेमाल पर रोक लगे, तो सरकार जनता के सामने एक सकारात्मक उदाहरण पेश कर सकती है।



