
बिलासपुर, 27 मई 2026। गंभीर अपराधों की विवेचना को अधिक प्रभावी और न्यायालयों में सजा का प्रतिशत बढ़ाने के उद्देश्य से बिलासपुर रेंज में “मरणासन्न कथन (Dying Declaration)” विषय पर एक दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का आयोजन पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज राम गोपाल गर्ग के मार्गदर्शन में किया गया, जिसमें रेंज के विभिन्न जिलों से लगभग 200 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए।

कार्यशाला में “मरणासन्न कथन, कानूनी प्रक्रिया, सावधानियां और विवेचकों के लिए दिशा-निर्देश” विषय पर विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुंगेली भोजराम पटेल ने किया तथा शासकीय अधिवक्ता मुंगेली रजनीकांत ठाकुर को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए आईजी राम गोपाल गर्ग ने कहा कि मृत्यु पूर्व कथन, डीएनए एवं भौतिक साक्ष्यों का सही संकलन अपराधियों को सजा दिलाने की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि विवेचना में छोटी-छोटी प्रक्रियात्मक त्रुटियां भी आरोपियों को लाभ पहुंचा देती हैं, इसलिए पुलिस अधिकारियों को कानूनी प्रक्रियाओं की गहन जानकारी होना आवश्यक है।
कार्यशाला के प्रमुख बिंदु
भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA), 2023 की धारा 26 के तहत मरणासन्न कथन को महत्वपूर्ण साक्ष्य बताया गया।
मजिस्ट्रेट द्वारा प्रश्नोत्तर प्रारूप में दर्ज बयान को न्यायालय में सर्वाधिक विश्वसनीय माना गया।
बयान दर्ज करने से पहले और बाद में डॉक्टर से पीड़ित के “फिट स्टेट ऑफ माइंड” प्रमाणपत्र लेने की अनिवार्यता पर जोर दिया गया।
विवेचकों को एफएसएल रिपोर्ट में रक्त समूह मिलान, कॉपी-पेस्ट से बचने और एससी/एसटी एक्ट मामलों में जातिगत शब्दों का स्पष्ट उल्लेख करने के निर्देश दिए गए।
गवाहों को कोर्ट में गवाही से पूर्व विधिक रूप से तैयार कराने पर भी विशेष बल दिया गया।
कार्यशाला के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें अधिकारियों ने विवेचना के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को साझा किया। शासकीय अधिवक्ता रजनीकांत ठाकुर ने प्रकरणों की विवेचना, साक्ष्य जप्ती और सैंपलिंग से जुड़ी जटिलताओं का समाधान बताया।
कार्यक्रम के अंत में आईजी राम गोपाल गर्ग ने सफल आयोजन के लिए सभी प्रतिभागियों और प्रशिक्षक का आभार जताया। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि इस प्रशिक्षण से गंभीर अपराधों की विवेचना और जैविक एवं भौतिक साक्ष्य संकलन की गुणवत्ता में सुधार होगा।
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