
सक्ती, 31 मई 2026। सक्ती थाना क्षेत्र में हुई दो अलग-अलग चोरी की घटनाओं का खुलासा करते हुए पुलिस ने आरोपी भागीरथी साहू को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के कब्जे से चोरी का सामान तथा एक चोरी की मोटरसाइकिल बरामद की गई है।

पुलिस के अनुसार थाना सक्ती में दर्ज अपराध क्रमांक 343/2025 एवं 88/2026 के तहत चोरी के मामलों की जांच की जा रही थी। पुलिस अधीक्षक प्रफ्फुल कुमार ठाकुर के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल एवं एसडीओपी डॉ. भुनेश्वरी पैकरा के मार्गदर्शन में आरोपी की तलाश लगातार जारी थी।
रविवार को थाना स्टाफ को मुखबिर से सूचना मिली कि करोरपारा सक्ती के पास एक युवक चोरी का सामान बेचने की फिराक में मोटरसाइकिल सहित मौजूद है। सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए पुलिस ने घेराबंदी कर संदेही को पकड़ लिया।
पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम भागीरथी साहू (27 वर्ष), निवासी डूमरपाली, थाना भूपदेवपुर, जिला रायगढ़ बताया। आरोपी ने पूछताछ के दौरान सक्ती क्षेत्र में दो चोरी की घटनाओं को अंजाम देना स्वीकार किया।
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने सितंबर 2025 में ग्राम हरेठी स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में खिड़की के रास्ते प्रवेश कर टीवी, टेबल फैन, एग्जॉस्ट फैन, ट्यूबलाइट और खाद्य सामग्री सहित करीब 20 हजार रुपये का सामान चोरी किया था। वहीं जनवरी 2026 में बुधवारी बाजार क्षेत्र स्थित एक सूने मकान का ताला तोड़कर चांदी के सिक्के, कांसे के बर्तन और नगदी सहित लगभग 15 हजार रुपये की चोरी की थी।
पूछताछ में आरोपी ने यह भी स्वीकार किया कि वह जुआ खेलने का आदी है और पैसों की जरूरत पूरी करने के लिए चोरी की घटनाएं करता था। उसने कुछ दिन पहले ओडिशा के बेलपहाड़ क्षेत्र से एक लाल रंग की हीरो होंडा स्प्लेंडर मोटरसाइकिल चोरी कर लाने की बात भी कबूल की।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से तीन कांसे के गिलास, दो कांसे के कटोरे तथा एक लाल रंग की हीरो होंडा स्प्लेंडर मोटरसाइकिल बरामद की है। बरामद सामान को विधिवत जब्त कर लिया गया है।गिरफ्तार आरोपी को न्यायालय में पेश किए जाने के बाद न्यायिक रिमांड पर उप जेल सक्ती भेज दिया गया है।
इस कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक लखन लाल पटेल के नेतृत्व में प्रधान आरक्षक मिथुन सुल्तान, हेमंत राठौर तथा आरक्षक दीपक बंजारे की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
![]() | ![]() | ![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |









































