
जिंदगी ने, जाते हुए वक्त से पूछा –
बदले हुए हालात में, यहाँ कैसे रुक गए?
न जाने कौन सी शिकायतों का, हम शिकार हो गए।
जितना दिल साफ रखा, उतना ही गुनहगार हो गये।
वक्त ने थोड़ा मुस्कराया, और बोला –
यहाँ समझ और समझाने में, वक्त बहुत बीत जाती है।
हर लम्हा हमें अवसर दे जाती है, जिंदगी जीने के लिए l
वक्त ने हमें यह भी बता दिया कि, सिर्फ पढ़ लिख कर कोई अच्छा इंसान नहीं बनता।
इसके लिए संस्कार और परवरिश, परिवार में बहुत मायना रखता है।
किताबें ज्ञान दे सकती हैं, पर चरित्र घर के दलहीज पर बनता है l
हमें याद रखनी चाहिए, किसी सच्चे इंसान के साथ गलत मत करो।
सच्चा इंसान कमज़ोर नहीं होता, वो बस सही वक्त का इंतजार करता है।
उसके दिल की चुप्पी को उसकी हार मत समझो,क्योंकि वह भीतर से बहुत मजबूत होता है।
जो उसके साथ छल करता है, वो खुद
अपने कर्मों से नष्ट हो जाता है।
अतः वक्त की नजाकत को समझे,मन के संकुचित पिंजरे से बाहर निकले l
यह दुनियां बड़ी हसीन दिखेगी, और हम बोल पड़ेंगे –
वक्त थोड़ा ठहर जाए यहां, इन लम्हों को समेटने के लिए।
यहां बहुत कुछ है, जिंदगी को जीने के लिए।
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