
रायगढ़, 18 जून 2026। रायगढ़ में स्थापित क्षेत्रीय न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) में वैज्ञानिक जांच प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। इस नई सुविधा का पहला लाभ थाना लैलूंगा को मिला, जहां एनडीपीएस एक्ट के तहत जप्त गांजा परीक्षण के लिए क्षेत्रीय एफएसएल में जमा कराया गया। यह प्रयोगशाला में जांच के लिए पहुंचा पहला मादक पदार्थ का नमूना है।

जानकारी के अनुसार थाना प्रभारी लैलूंगा उप निरीक्षक गिरधारी साव अपने स्टाफ के साथ 17 जून को जप्त गांजा का नमूना लेकर क्षेत्रीय एफएसएल रायगढ़ पहुंचे और परीक्षण के लिए जमा कराया। इससे अब रायगढ़, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों में अपराध अनुसंधान को नई गति मिलने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 17 मई 2026 को सुशासन तिहार के अवसर पर रायगढ़ के राजमहल के समीप स्थापित क्षेत्रीय न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला का शुभारंभ किया था। प्रयोगशाला में वर्तमान में नारकोटिक्स, केमिस्ट्री तथा बायोलॉजी (सेरोलॉजी, सीमेन और ब्लड) से जुड़े परीक्षण किए जा रहे हैं।
अब तक इन जिलों की पुलिस को व्हीसरा, रक्त नमूने, मादक पदार्थ और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों की जांच के लिए बिलासपुर स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे रिपोर्ट प्राप्त करने में अधिक समय लगता था। क्षेत्रीय एफएसएल शुरू होने से जांच रिपोर्ट समय पर उपलब्ध होगी और विवेचना प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी।
सीन ऑफ क्राइम यूनिट रायगढ़ के संयुक्त संचालक डॉ. पी.एस. भगत ने बताया कि वर्तमान आपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक साक्ष्यों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में क्षेत्रीय एफएसएल पुलिसिंग व्यवस्था को तकनीकी रूप से और अधिक मजबूत बनाएगी तथा अपराधों की वैज्ञानिक जांच को गति देगी।
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया महत्वपूर्ण कदम
रायगढ़ जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) लागू होने के बाद अपराध अनुसंधान में फॉरेंसिक साक्ष्यों का महत्व और बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि रायगढ़ में क्षेत्रीय एफएसएल की स्थापना वैज्ञानिक एवं साक्ष्य आधारित पुलिसिंग को मजबूत करेगी।
एसएसपी ने विश्वास जताया कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध इस सुविधा से गंभीर अपराधों की जांच में तेजी आएगी, अभियोजन पक्ष को मजबूती मिलेगी और पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाने में मदद मिलेगी। साथ ही यह सुविधा आधुनिक और तकनीक आधारित पुलिसिंग को नई दिशा प्रदान करेगी।
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