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समसामयिक सलाह :अच्छी वर्षा का लाभ उठाकर खरीफ फसलों के कृषि कार्य समय पर पूर्ण करें

कोरबा 06 जुलाई 2026/ कृषि विज्ञान केंद्र, कोरबा ने जिले के किसानों से अपील की है कि हाल के दिनों में हो रही अच्छी वर्षा का अधिकतम लाभ उठाते हुए खरीफ मौसम से जुड़े सभी कृषि कार्य समय पर पूर्ण करें। जिन किसानों की धान की नर्सरी तैयार हो चुकी है, वे खेत में पर्याप्त नमी का लाभ लेते हुए शीघ्र रोपाई करें। धान की रोपाई कतार पद्धति से करने, 20-21 दिन की पौध का उपयोग करने तथा अनुशंसित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है, ताकि पौधों की संख्या संतुलित रहे, खरपतवार नियंत्रण आसान हो और उत्पादन में वृद्धि हो। जिन किसानों ने अभी तक धान की बुवाई नहीं की है, वे वर्तमान मौसम को देखते हुए मिट्टी में अनुकृल नमी होने पर लेही विधि से बुवाई करें। प्रमाणित अथवा आधार श्रेणी के बीजों का एजोस्पाइरिलम एवं पीएसबी कल्चर से बीजोपचार करने की भी सलाह दी गई है। साथ ही, अनुशंसित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग तथा समय पर नाइट्रोजन का छिड़काव करने पर विशेष जोर दिया गया है।
धान एवं मक्का की फसलों में अंकुरण पूर्व तथा अंकुरण पश्चात खरपतवारनाशी का उपयोग करने की सलाह दी गई है। वहीं, मक्का की फसल में आवश्यकता अनुसार निराई-गुड़ाई एवं मिट्टी चढ़ाने का कार्य भी समय पर करें।
वर्तमान मौसम को ध्यान मे रखते हुए 10‘- 15 दिन पश्चात् दलहनी फसलों जैसे अरहर, उड़द एवं मूंग की शीघ्र/कम अवघि की उन्नतशील किस्में तथा उच्चहन भूमि में तिलहनी फसल विशेषकर तिल एवं मूंगफली की अनुशंसित बीज दर, निश्चित कतार दूरी एवं बीजोपचार के साथ बुवाई करने की सलाह दी गई है। किसानों से आग्रह है कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरको का संतुलित उपयोग करें।
खरीफ मौसम में लौकी, कद्दू, करेला, तोरई, भिंडी, बरबटी, मिर्च, बैंगन सहित अन्य मौसमी सब्जियों की समय पर बुवाई करने तथा तैयार नर्सरी वाली मिर्च, बैंगन एवं फूलगोभी की रोपाई शुरू करने की अपील की गई है। अदरक, हल्दी, भिंडी एवं बरबटी की फसलों में समय-समय पर निराई-गुड़ाई तथा अधिक वर्षा की स्थिति में जल निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की सलाह भी दी गई है।
वर्तमान समय को आम, अमरूद, नींबू, कटहल, सहजन एवं केले सहित अन्य फलदार पौधों के रोपण के लिए भी उपयुक्त बताया गया है। पौधरोपण के समय अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद एवं अनुशंसित उर्वरकों का उपयोग करने तथा पौधों की नियमित देखभाल करने की सलाह दी गई है।
वर्षा जल एक प्राकृतिक संसाधन है और इसके संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है जिसके लिए किसान अपने खेत की मेड़ों को मजबूत रखे, खेत तालाब, डबरी, मेड़बंदी एवं अन्य जल संचयन संरचनाओं के माध्यम से वर्षा जल का अधिकतम संरक्षण करें, संरक्षित जल का उपयोग वर्षा के अंतराल के दौरान सिंचाई के लिए किया जा सकता है। साथ ही खेत में नमी बनाए रखने के लिए उचित जल प्रबंधन, एवं मल्चिंग अपनाने की सलाह दी गई है।

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