
कहा जा रहा इससे अच्छा तो मनोनीत कर लेते
कोरबा। इसी महीने संपन्न होने जा रहे छत्तीसगढ़ आयुर्वेद, यूनानी और प्राकृतिक चिकित्सा परिषद का चुनाव क्या निष्पक्ष हो भी सकेगा? सवाल इसलिए खड़े हो रहे हैं क्योंकि सरकारी चिकित्सकों की ओर से संभाग के लिए डॉ. निशांत कौशिक और निजी चिकित्सकों की ओर से डॉ. सुरेंद्र मिश्रा संभागीय प्रत्याशी बनाए गए हैं। खबर है कि सरकारी टीम ने आज कोरबा पहुंचकर सरकारी और निजी चिकित्सकों पर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बैलेट सौंपने के लिए दबाव बनाया। इससे कहा जा रहा है कि अगर सरकारी प्रत्याशी को चुनना ही मजबूरी है तो फिर सीधे मनोनयन क्यों नहीं कर लिया गया।
सूत्रों से मिली जानकारी में कहा गया कि छत्तीसगढ़ आयुर्वेद अधिकारी संघ के प्रांतीय पदाधिकारी डॉ. पंडा और उनके अधिकृत प्रत्याशी कौशिक यहां पहुंचे। वोट डालने वालों को निर्देशित किया गया कि वे अपना मतपत्र लेकर आएं और जिला आयुर्वेद अधिकारी के सामने अगली प्रक्रिया पूरी करें। जबकि आयुष्मान के चुनाव को लेकर लगातार इस तरह की बात की जाती रही कि लोकतांत्रिक मूल्य और पारदर्शिता के साथ निर्वाचन कराया जाएगा। डॉ. सुरेंद्र मिश्रा ने इस बारे में रजिस्ट्रार को तथ्यों से अवगत कराना तय किया है। उनका कहना है कि चिकित्सकों पर खास चेहरे के लिए मतदान करने हेतु दबाव बनाया जा रहा है। डॉ. मिश्रा ने बताया कि बिलासपुर संभाग के अनेक आयुष चिकित्सकों से जानकारी मिली कि कुछ व्यक्तियों और समूह की ओर से प्रत्याशी विशेष के पक्ष में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से दबाव की रणनीति पर काम किया जा रह है जो अनुचित है। संगठन में काम करने वाले लोग शिक्षित और विवेकवान हैं। उन्हें स्वतंत्र इच्छा से मतदान करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। ऐसे में दबाव, भय और प्रलोभन दिया जाना व्यवस्था के खिलफ है। डॉ. मिश्रा ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच कराते हुए चुनाव को नियमों के तहत कराने का काम किया जाए, न किया दबाव डालने का।
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