
कोरबा। आमतौर पर सरकारी दफ्तरों में अपनी समस्या लेकर पहुंचने वाले जरूरतमंदों को आवेदन, आश्वासन और कार्रवाई के इंतजार की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। लेकिन कोरबा में जनदर्शन के दौरान तस्वीर कुछ अलग नजर आई। कलेक्टर कुणाल दुदावत और जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन ने तीन दिव्यांगों की परेशानी को महज एक आवेदन मानकर नहीं छोड़ा, बल्कि उनकी जरूरत को समझते हुए तत्काल ट्रायसाइकिल उपलब्ध कराने की पहल की।
जनदर्शन में पहुंचे तीन दिव्यांगों ने आवागमन में हो रही परेशानी और अपनी आर्थिक स्थिति से अधिकारियों को अवगत कराया। समस्या सुनने के बाद कलेक्टर कुणाल दुदावत ने संवेदनशीलता दिखाते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद तीनों दिव्यांगों को ट्रायसाइकिल उपलब्ध कराई गई, जिससे उन्हें अपने दैनिक आवागमन में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
सिर्फ ट्रायसाइकिल ही नहीं, इलाज में भी मदद का भरोसा

जनदर्शन में अपनी बीमारी और उपचार से जुड़ी समस्या लेकर पहुंचे जरूरतमंदों को प्रशासन की ओर से राहत का भरोसा दिया गया। कलेक्टर ने इलाज के लिए आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया, ताकि आर्थिक तंगी किसी जरूरतमंद के उपचार में बाधा न बने।
इस दौरान जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन भी मौजूद रहे और जरूरतमंदों की समस्याओं को गंभीरता से सुना। अधिकारियों की संवेदनशील पहल ने यह संदेश दिया कि जनदर्शन केवल शिकायतें सुनने का मंच नहीं, बल्कि जरूरतमंदों को तत्काल राहत दिलाने का माध्यम भी बन सकता है।
अधिकारी कुर्सी पर नहीं, जरूरतमंद के साथ खड़े दिखे

तीन दिव्यांगों को तत्काल ट्रायसाइकिल मिलना और उपचार के लिए आर्थिक मदद का भरोसा मिलना प्रशासन की कार्यशैली में मानवीय संवेदना की मिसाल के तौर पर सामने आया है। जनदर्शन में पहुंचे लोगों के लिए यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि उन्हें अपनी समस्या के समाधान के लिए केवल आश्वासन नहीं, बल्कि मौके पर ही राहत की दिशा में ठोस कदम देखने को मिला।
कलेक्टर कुणाल दुदावत और जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन की इस पहल ने जनदर्शन को संवेदनशील प्रशासन की वास्तविक तस्वीर में बदल दिया,जहां फरियाद सुनने के साथ जरूरतमंद का हाथ थामने की कोशिश भी नजर आई।
![]() | ![]() | ![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |









































