बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक मां दुर्गा की भक्ति में लीन दिखे श्रद्धालु, पारंपरिक बंगाली संस्कृति और भक्तिमय प्रस्तुतियों ने उत्सव में लगाया चार चांद

कोरबा। औद्योगिक नगरी कोरबा में शारदीय दुर्गा पूजा का उत्साह अपने चरम पर है। इसी कड़ी में NTPC कोरबा में बंगाली समाज द्वारा आयोजित दुर्गा पूजा उत्सव में भक्ति, आस्था और बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। मां दुर्गा की आराधना के बीच जब श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ शंखनाद किया, तो पूरा पूजा परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। वहीं पारंपरिक धुनुची नृत्य ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया और उत्सव का प्रमुख आकर्षण बन गया।

दुर्गा पूजा के इस विशेष आयोजन में बच्चों, युवाओं, युवतियों, महिलाओं और पुरुषों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सभी ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुरूप मां दुर्गा की आराधना करते हुए अपनी आस्था और भक्ति का परिचय दिया। शंखनाद की गूंज, धुनुची नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति और श्रद्धालुओं के उत्साह ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। पूजा स्थल पर मौजूद लोगों के चेहरों पर उत्साह, उमंग और मां दुर्गा के प्रति अटूट श्रद्धा साफ झलक रही थी।
शंखनाद से गूंज उठा पूजा परिसर

बंगाली समाज की दुर्गा पूजा में शंखनाद का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। इसी परंपरा को जीवंत करते हुए समाज के सदस्यों ने शंख बजाकर मां दुर्गा की आराधना की। एक साथ गूंजते शंखों की पवित्र ध्वनि ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। शंखनाद के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह देखते ही बन रहा था।

इस पारंपरिक आयोजन ने न केवल धार्मिक वातावरण को और अधिक प्रभावशाली बनाया, बल्कि बंगाली समाज की सांस्कृतिक विरासत को भी खूबसूरती से प्रस्तुत किया। शंखनाद की गूंज के बीच मां दुर्गा के जयकारों ने श्रद्धालुओं में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया।
धुनुची नृत्य बना उत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण

दुर्गा पूजा के दौरान बंगाल की प्रसिद्ध सांस्कृतिक परंपरा धुनुची नृत्य ने विशेष आकर्षण बिखेरा। पारंपरिक धुनुची लेकर श्रद्धालुओं ने लयबद्ध अंदाज में नृत्य करते हुए मां दुर्गा के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की। धुनुची से उठता धुआं, नृत्य की मनमोहक मुद्राएं और पारंपरिक अंदाज ने पूरे आयोजन को यादगार बना दिया।
धुनुची नृत्य बंगाली दुर्गा पूजा की पहचान माना जाता है। यह केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि मां दुर्गा के प्रति समर्पण, भक्ति और उल्लास की अभिव्यक्ति है। NTPC कोरबा में आयोजित इस उत्सव के दौरान जब श्रद्धालु धुनुची नृत्य में लीन हुए, तो वहां उपस्थित लोगों के लिए यह दृश्य आकर्षण का केंद्र बन गया। लोगों ने इस पारंपरिक प्रस्तुति का आनंद लिया और उत्सव की खुशियों में सहभागी बने।
बच्चों से लेकर महिलाओं और पुरुषों तक दिखा उत्साह
इस दुर्गा पूजा उत्सव की खास बात यह रही कि इसमें समाज के हर आयु वर्ग की भागीदारी देखने को मिली। बच्चों के उत्साह से लेकर युवाओं की सक्रियता और महिलाओं-पुरुषों की श्रद्धापूर्ण सहभागिता ने आयोजन को विशेष बना दिया। सभी ने मिलकर मां दुर्गा की आराधना की और पारंपरिक रीति-रिवाजों के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक पहचान को जीवंत रखा।
बच्चों और युवाओं की भागीदारी ने यह संदेश भी दिया कि नई पीढ़ी अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी हुई है। वहीं महिलाओं और पुरुषों ने शंखनाद तथा धुनुची नृत्य में हिस्सा लेकर सामूहिक भक्ति और सामाजिक एकजुटता की सुंदर तस्वीर प्रस्तुत की।
आस्था के साथ संस्कृति और एकजुटता का संदेश
NTPC कोरबा में बंगाली समाज द्वारा आयोजित दुर्गा पूजा उत्सव ने एक बार फिर यह साबित किया कि धार्मिक पर्व केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं होते, बल्कि समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का भी महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
मां दुर्गा की आराधना के साथ शंखनाद और धुनुची नृत्य जैसी परंपराओं ने आयोजन को विशिष्ट पहचान दी। पूरे उत्सव में भक्ति, उल्लास और सांस्कृतिक सौहार्द का वातावरण दिखाई दिया। विभिन्न आयु वर्ग के लोगों की सहभागिता ने इस आयोजन को सामूहिक उत्सव का रूप प्रदान किया।
कुल मिलाकर, NTPC कोरबा में बंगाली समाज का दुर्गा पूजा उत्सव श्रद्धा, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का मनमोहक उदाहरण बनकर सामने आया। शंखनाद की पवित्र गूंज और धुनुची नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियों ने उत्सव की रौनक बढ़ा दी। मां दुर्गा के प्रति अटूट आस्था और सामूहिक सहभागिता से सजा यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए यादगार बन गया।





