
निर्यात योग्य सुगंधित धान की खेती सहित वन डिस्ट्रिक-वन एरोमेटिक वेरायटी को बढ़ावा देने के निर्देश
बीज उत्पादन को बढ़ावा देकर बीज आपूर्ति में आत्मनिर्भर बनने पर बल
धान के रकबा में कमी लाने सहित मिलेट्स फसलों और दलहन-तिलहन की खेती को बढ़ावा देने के निर्देश
कृषि उत्पादन आयुक्त ने संभाग स्तरीय रबी 2025 की समीक्षा सहित खरीफ 2026 तैयारी की समीक्षा कर कार्ययोजना के प्रभावी क्रियान्वयन करने दिए निर्देश
जगदलपुर, 28 अप्रैल 2026/ विकसित बस्तर की परिकल्पना को साकार करने के लिए कृषि क्षेत्र सहित आनुशांगिक सेक्टरों की अहम भूमिका है। यह बस्तर के समग्र विकास की धुरी है। इसे मद्देनजर रखते हुए मक्का एवं मिलेट्स फसलों, दलहन-तिलहन फसल क्षेत्र विस्तार, मसाला फसलों के रकबा विस्तार के लक्ष्य को हासिल करने पर ध्यान केंद्रीत करें। निर्यात योग्य सुगंधित धान की खेती को प्रोत्साहित करने सहित वन डिस्ट्रिक-वन एरोमेटिक वेरायटी पर फोकस करें।साथ ही बस्तर में जैविक खेती की अपार संभावनाओं को देखते हुए जैविक खेती को ज्यादा प्रोत्साहित करने सहित यहां की अनुकूल वातावरण के मद्देनजर कॉफी एवं ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा दिया जाए। वहीं पशुपालन और मत्स्यपालन एवं झींगापालन के लिए व्यापक स्तर पर पहल किया जाए। उक्त निर्देश कृषि उत्पादन आयुक्त शहला निगार ने जगदलपुर के कलेक्टोरेट प्रेरणा सभागार में आयोजित संभाग स्तरीय रबी 2025 की समीक्षा सहित खरीफ फसल सीजन 2026 के तैयारी की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को दिए। उन्होंने खरीफ फसल सीजन 2026 के कार्ययोजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने पर बल देते हुए नियमित तौर पर समीक्षा किए जाने के निर्देश कलेक्टर्स तथा अन्य अधिकारियों को दिए। कृषि उत्पादन आयुक्त शहला निगार ने बस्तर के किसानों की बीज की मांग को स्थानीय स्तर पर पूर्ति करने आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य निर्धारित कर बीज उत्पादन कार्यक्रम से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के कृषकों सहित महिला कृषकों को प्रोत्साहित करने पर बल देते हुए कहा कि इन वर्गों के किसानों को बीज प्रमाणीकरण पंजीयन शुल्क से छूट प्राप्त है, इसलिए बीज उत्पादन कार्यक्रम से उक्त वर्ग के किसानों को ज्यादा से ज्यादा जोड़ने पहल करें। इन्हें बीज एवं अन्य आदान सामग्री की उपलब्धता सहित प्रशिक्षण से लाभान्वित किया जाए। उन्होंने खरीफ फसल सीजन में धान के रकबा में कमी लाने के लिए निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने हेतु कार्ययोजना के अनुसार कोदो-कुटकी एवं रागी मिलेट्स सहित दलहन-तिलहन फसलों की खेती को बढ़ावा देने कहा। इस दिशा में मक्का की खेती को विशेष तौर पर प्रोत्साहित किए जाने के निर्देश दिए।साथ ही उच्चहन भूमि यथा टिकरा एवं मरहान भूमि पर आम, काजू, कटहल, सीताफल इत्यादि उद्यानिकी फसलों सहित कंद वर्गीय फसलों में जिमीकंद, रतालू, शकरकंद, अरबी, तिखुर आदि को प्रोत्साहित करने कहा।
जैविक खेती को प्रोत्साहन देने पर बल
कृषि उत्पादन आयुक्त ने बस्तर में जैविक खेती की अपार सम्भावनाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि यहां की भूमि की उर्वरता और वातावरण जैविक खेती के लिए काफी अनुकूल है। इसलिए अधिकाधिक किसानों को जैविक खेती करने के लिए प्रोत्साहित करें और उन्हें हरसम्भव मदद सुलभ कराया जाए। उन्होंने इस दिशा में दंतेवाड़ा जिले की तरह अन्य जिलों में भी पहले से आर्गेनिक खेती करने वाले क्षेत्रों को चिन्हित कर एक से दो विकासखंडों का चयन कर प्रभावी क्रियान्वयन किए जाने कहा। साथ ही नेशनल मिशन आन नेचुरल फार्मिंग के लिए भी बस्तर को उपयुक्त निरूपित करते हुए इस दिशा में तैयार कार्ययोजना का कारगर कार्यान्वयन किए जाने के निर्देश दिए। कृषि उत्पादन आयुक्त ने 10 वर्ष के भीतर तथा 10 वर्ष से पुरानी विभिन्न किस्मों के रकबा विस्तार के लिए भी प्राथमिकता के साथ क्रियान्वयन सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए।
बस्तर बनेगा पाम ऑयल हब
कृषि उत्पादन आयुक्त ने नेशनल मिशन आन एडिबले ऑयल की कार्ययोजना को व्यापक स्तर पर क्रियान्वयन करने पर बल देते हुए कहा कि बस्तर के उच्चहन भूमि तथा अनुकूल जलवायु ऑयल पाम की खेती के लिए काफी मुनासिब है। किसान ऑयल पाम की खेती के साथ पामा रोजा एवं लेमनग्रास की इंटर क्रॉपिंग भी कर सकते हैं। साथ ही साग-सब्जी की खेती को भी प्रोत्साहित किया जा सकता है। अतएव भविष्य में खाद्य तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बस्तर में ऑयल पाम की खेती को प्रोत्साहन दिया जाए। इस दिशा में कलस्टर बनाकर किसानों का चयन करने सहित उन्हें हरेक सहायता सुलभ कराया जाए। कृषि उत्पादन आयुक्त ने बस्तर संभाग के जिलों में सूरजमुखी की खेती को भी बढ़ावा देकर ज़्यादा से ज्यादा रकबा में वृद्धि करने के निर्देश दिए।
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