
डेढ़ माह के बच्चे को बचाकर कराया इलाज, बाल कल्याण समिति तक निभाई पूरी जिम्मेदारी



रायगढ़, 29 मई 2026। रायगढ़ रेलवे स्टेशन के बाहर मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई, जहां करीब डेढ़ माह के मासूम बच्चे के साथ एक महिला द्वारा बेरहमी की जा रही थी। बच्चे की चीख-पुकार सुनकर आसपास मौजूद लोगों ने महिला को रोकने की कोशिश की, लेकिन जब वह नहीं मानी तो तत्काल कोतवाली पुलिस को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही पुलिस पेट्रोलिंग टीम में शामिल एएसआई गौतम ठाकुर, आरक्षक गणेश पैंकरा और अन्य जवान मौके पर पहुंचे तथा बच्चे को सुरक्षित महिला के कब्जे से बाहर निकालकर अपने संरक्षण में लिया। मासूम घायल और डरा हुआ था, जिसे तत्काल केजीएच अस्पताल पहुंचाकर उपचार शुरू कराया गया।
महिला आरक्षक अनिता बेक ने बच्चे को प्राथमिक उपचार के बाद एमसीएच वार्ड में भर्ती कराया और पूरे इलाज के दौरान उसकी देखभाल की। वहीं पुलिस द्वारा महिला से पूछताछ में उसकी मानसिक स्थिति सामान्य नहीं पाई गई। बाद में पता चला कि महिला इंदिरा नगर क्षेत्र की रहने वाली है और मानसिक रूप से अस्वस्थ रहती है।
महिला के पति को बुलाकर पूछताछ की गई, जिसने बच्चे को अपना पुत्र बताया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बच्चे की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी और उपचार पूरा होने तक अस्पताल में भर्ती रखा।
26 मई को डिस्चार्ज के दौरान बच्चे को महिला आरक्षक अनिता बेक के सुपुर्द किया गया, जिन्होंने उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया। समिति ने माता-पिता, दादी और नानी की काउंसलिंग के बाद बच्चे को अस्थायी रूप से पिता के सुपुर्द किया।
बाल कल्याण समिति ने 29 मई को पुनः माता-पिता को काउंसलिंग और आवश्यक प्रक्रियाओं के लिए बुलाया है। कोतवाली पुलिस भी लगातार बच्चे की सुरक्षा और भविष्य को लेकर निगरानी बनाए हुए है।
इस पूरे घटनाक्रम में रायगढ़ पुलिस ने न केवल त्वरित कार्रवाई कर मासूम की जान बचाई, बल्कि उपचार, संरक्षण और कानूनी प्रक्रिया की पूरी जिम्मेदारी निभाकर संवेदनशील पुलिसिंग का उदाहरण भी पेश किया।
एसएसपी शशि मोहन सिंह का संदेश
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा समाज और परिवार दोनों की साझा जिम्मेदारी है। यदि किसी बच्चे के साथ हिंसा या दुर्व्यवहार की जानकारी मिले तो लोग उसे नजरअंदाज न करें और तत्काल पुलिस को सूचित करें। उन्होंने कहा कि रायगढ़ पुलिस बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है तथा ऐसे मामलों में मानवीय दृष्टिकोण के साथ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करती है।
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