
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 में बल्क जनरेटरों को नये सिरे किया गया चिन्हांकित
कोरबा 25 अप्रैल 2026।शहरी निकाय क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण निकाय क्षेत्रांतर्गत ऐसे वेस्ट बल्क जनरेटर जो भारी मात्रा में कचरे का उत्सर्जन करते हैं एवं उनकी इकाईयॉं निर्धारित मानदण्डों के अंतर्गत आती है, उनकी अपने यहां उत्सर्जित कचरे के समुचित प्रबंधन व निपटान की जवाबदारी अपनी स्वयं की है। उन्हें कचरे के प्रबंधन हेतु अपनी इकाईयों संस्थानों में अनिवार्य रूप से आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी होगी।
नगर पालिक निगम कोरबा के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.संजय तिवारी ने बताया कि भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा 27 जनवरी 2026 राज्यपत्र में अधिसूचना जारी कर बल्क वेस्ट जनरेटरों के यहॉं उत्सर्जित कचरे के प्रबंधन के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दिये गये हैं तथा बल्क वेस्ट जनरेटरों को नये सिरे से चिन्हांकित किया गया है। यह ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 एक अप्रैल से प्रवृत्त किये गये हैं, ये नियम प्रत्येक शहरी निकाय के साथ-साथ ग्रामीण स्थानीय निकाय पर भी लागू होंगे, जिसमें उनके अधिकार क्षेत्र के अधीन आने वाली सभी संस्थाएं सम्मिलित है, चाहें वह सरकार द्वारा नियंत्रित व प्रबंधित हों, निजी क्षेत्र या लोक निजी भागीदारी में, विशेष अधिसूचित क्षेत्र, अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्र या टाऊनशिप, विशेष आर्थिक जोन, फूड पार्क, भारतीय रेलवे के नियंत्रण वाले क्षेत्र जिनमें रेलवे स्टेशन, रेलवे ट्रेक और रेलवे ट्रेक से सटे भूमि खण्ड सम्मिलित है, हवाई अड्डे, एयरबेस, पत्तन और विमान पत्तन सम्मिलित हैं, रक्षा प्रतिष्ठान, लोक और निजी प्रतिष्ठान, राज्य और केन्द्रीय सरकार के संगठन, तीर्थ स्थल, धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के स्थान और सभी भूमि मालिक और प्रत्येक घरेलु संस्थागत, वाणिज्यिक और किसी अन्य गैरआवासीय ठोस अपशिष्ट उत्पादक पर लागू होंगे।
बल्क वेस्ट जनरेटर चिन्हाकित
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 में बल्क वेस्ट जनरेटरों को नये सिरे से चिन्हाकित किया गया है, जिसके अनुसार भारी मात्रा में अपशिष्ट जनरेट करने वाली वे इकाईयॉं जो इन मानदण्डों में से कम से कम एक को पूरा करती हो, यथा 20 हजार वर्गमीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले भवन या प्रतिदिन 40 हजार लीटर पानी की खपत या प्रतिदिन 100 किलोग्राम ठोस अपशिष्ट का उत्सर्जन सम्मिलित हैं, इसके तहत केन्द्रीय सरकार के विभाग या उपक्रम, राज्य सरकार के विभागों या उपक्रमों के द्वारा अधिग्रहित भवन, स्थानीय निकाय द्वारा अधिग्रहित भवन, पब्लिक सेक्टर उपक्रम या निजी कम्पनियॉं, स्कूल, कालेज, विश्वविद्यालय अन्य शैक्षणिक संस्थान और सामुदायिक स्थान या उस जैसे स्थान शामिल हैं। इसी प्रकार रेलवे, बस स्टैण्ड या डिपो, विमान पत्तन सहित वाणिज्यिक स्थापनाएं, औद्योगिक इकाईयॉं और औद्योगिक क्षेत्र, माल, मल्टीप्लेक्स, होटल, अस्पताल, नर्सिंग होम, छात्रावास, कृषि और बागवानी उत्पादों, मछली और मांस के लिये मण्डियों सहित थोक बाजार, स्टेडियम, खेल परिसर, सामुदायिक हाल, कन्वेंशन हाल, आडिटोरियम, विवाह या भोज हाल, सम्मेलन केन्द्र, एक्सपो सेल्टर, प्रदर्शनी क्षेत्र व पर्यटन स्थल आदि वाणिज्यिक उपयोक्ता व आवासीय सोसायटी शामिल हैं।
डस्टबिन रखना अनिवार्य है
सूखे-गीले व अन्य प्रकार के कचरे के संग्रहण हेतु डस्टबिन रखना अनिवार्य है, इसके साथ ही प्रत्येक सड़क विक्रेता अर्थात रोड साईट पर व्यवसाय करने वालों को अपने कार्यकलाप के दौरान उत्पन्न अपशिष्ट जैसे खाद्य अपशिष्ट, डिस्पोजल, प्लेट, कप, डिब्बे, रेपर, नारियल के खोल, बचा हुआ भोजन, सब्जियांॅ फल आदि के भण्डारण के लिये उपयुक्त कन्टेनर रखना आवश्यक है और ऐसे अपशिष्ट को स्थानीय निकाय, नगर निगम आदि द्वारा अधिसूचित अपशिष्ट भण्डारण या डिपो या कन्टेनर या वाहन में जमा करना होगा, इसके लिये अपशिष्ट उत्पादनकर्ता निकाय द्वारा नियत किये गये यूजर चार्जेज फीस प्रदाय करनी होगी। इसी प्रकार पृथक ठोस अपशिष्ट अर्थात गीला अपशिष्ट, सूखा कचरा, विशेष देखभाल वाला अपशिष्ट और सेनेटरी अपशिष्ट के भण्डारण के लिये उपयुक्त कन्टेनर रखने हांगे तथा इस पृथक अपशिष्ट को अधिकृत अपशिष्ट संग्रहणकर्ताओं या स्थानीय निकाय द्वारा निर्धारित अपशिष्ट संगहण वाहनों के माध्यम से भेजना होगा।
कार्यक्रम आयोजन की सूचना 03 दिन पूर्व देनी आवश्यक
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 में स्पष्ट निर्देश दिये गये हैं कि कोई भी व्यक्ति अग्रिम रूप से कम से कम 03 कार्य दिवस पहले स्थानीय निकाय को सूचित किये बिना किसी भी गैरअनुज्ञप्ति वाले स्थान पर 100 व्यक्तियों से अधिक का कोई आयोजन व समारोह आयोजित नहीं करेगा तथा ऐसा व्यक्ति या आयोजक यह सुनिश्चित करेगा कि अपशिष्ट का स्त्रोत पर पृथक्करण हों एवं पृथक किये गये अपशिष्ट को स्थानीय निकाय द्वारा निर्धारित यूजर चार्जेज की राशि जमा कराने के पश्चात एजेंसी को या अभिकरण को सौप दिया जाए तथा इस उत्पन्न अपशिष्ट का नियमानुसार निस्तारण किया जाए। इसके अतिरिक्त अपशिष्ट प्रबंधन व निस्तारण के संबंध में विस्तृत दिशा निर्देश ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के अंतर्गत प्रदान किये गये हैं।
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