कलेक्टर श्री अग्रवाल ने जिले के सभी राजस्व अधिकारियों की बैठक लेकरउनके कामकाज की समीक्षा की
राजस्व प्रकरणों का निराकरण गंभीरतापूर्वक करें अधिकारी

समय-सीमा के बाहर कोई भी प्रकरण लंबित न हो
गरियाबंद 30 अप्रैल 2024/ कलेक्टर दीपक कुमार अग्रवाल ने जिले के सभी राजस्व अधिकारियों की बैठक लेकर उनके कामकाज की विस्तारपूर्वक समीक्षा की। उन्होंने राजस्व अधिकारियों से विभिन्न प्रकरणों और उनके निराकरण के संबंध में जानकारी लेते हुए अविवादित व विवादित नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, रजिस्ट्री, खाता विभाजन, निराकृत, नक्शा शुद्धिकरण, अभिलेख शुद्धता, अभिलेख जमा करने की स्थिति, राजस्व वसूली, नजूल, कृषि भूमि एवं आबादी पट्टों पर भू-स्वामी पर अधिकार किये जाने संबंधी आवेदनों के निराकरण की स्थिति, 7500 वर्गफीट तक शासकीय भूमि का व्यवस्थापन, आबंटन, मसाहती/असर्वेक्षित ग्रामों का सर्वेक्षण, पटवारी की डिजिटल हस्ताक्षर से अभिलेखों के सत्यापन की स्थिति, आधार सीडिंग की स्थिति, भू-नक्शा अपडेशन, वन अधिकार पट्टा हेतु आवेदन/जांच हेतु आवेदनों की स्थिति, हाईकोर्ट में लंबित प्रकरणों की जानकारी, लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 का क्रियान्वयन एवं अद्यतन प्रगति, स्लम पट्टों, नजूल पट्टों, आबादी भूमि धारकों को मालिकाना हक प्रदान करने में हुई प्रगति, अवैध खनिज उत्खनन पर कार्यवाही की जानकारी, नक्शों के जियोरेफेरेसिंग के लिए अनडिस्पुटेड पॉइंट के चयन सम्बधित ग्रामवार जानकारी, जनचौपाल जन शिकायत एवं अन्य आवेदनों की निराकृत लंबित एवं शेष जानकारी, लोकसेवा केन्द्र के अंतर्गत निराकृत लंबित शेष ओवदनों की जानकारी और सूचना के अधिकार के अंतर्गत निराकृत लंबित एवं शेष आवेदनों की जानकारी पर विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने इस दौरान कहा कि राजस्व प्रकरणों का समय-सीमा में निराकरण कर आम जन की मदद करें।
कलेक्टर ने राजस्व अधिकारियों कि अनुभागवार/तहसीलवार राजस्व प्रकरणों की समीक्षा करते हुए प्रकरणों को यथाशीघ्र शत् प्रतिशत् निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। बैठक में राजस्व अधिकारियों को लोक सेवा गारंटी अधिनियम अंतर्गत प्राप्त आवेदनों को विहित समयावधि में निराकरण कर तहसीलदारो को किसान हित में नक्शा अद्यतीकरण करने हेतु निर्देश दिये गये। इस अवसर पर संयुक्त कलेक्टर राकेश कुमार गोलछा, पंकज डाहिरे सहित सभी एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार उपस्थित थे।
![]() | ![]() | ![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |









































