
बिलासपुर, 18 जून 2026। बिल्हा थाना पुलिस ने क्षेत्र में अवैध उगाही, मारपीट और दहशत फैलाने वाले हिस्ट्रीशीटर बदमाश के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। आरोपी क्रेशर में चलने वाले ट्रक चालकों से जबरन वसूली कर रहा था तथा पैसे नहीं देने पर मारपीट और धमकी देता था।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी सत्यप्रकाश उर्फ सत्या उर्फ प्रदीप घृतलहरे (44 वर्ष) निवासी ग्राम कनेरी, थाना चकरभाठा है। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है।


ट्रक चालकों से कर रहा था अवैध वसूली
प्रार्थी महेश शर्मा ने थाना बिल्हा में शिकायत दर्ज कराई कि 16 जून की दोपहर ग्राम दुर्गडीह में सत्यप्रकाश घृतलहरे अपने भाई दिलेश घृतलहरे एवं अन्य साथियों के साथ मिलकर क्रेशर में कार्यरत ट्रक चालकों से शराब पीने के नाम पर अवैध रूप से पैसे मांग रहा था। विरोध करने पर ट्रक चालक पुन्नू यादव और मोनू राजपाल के साथ मारपीट कर जान से मारने की धमकी दी गई।
शिकायत में बताया गया कि आरोपी पंचायत भवन के सामने टेंट लगाकर वाहनों को रोक रहा था और रॉयल्टी की जांच के नाम पर उगाही कर रहा था। आरोपी खुलेआम शासन-प्रशासन को चुनौती देते हुए वाहनों से पैसे वसूलने की बात कह रहा था।
घेराबंदी कर किया गिरफ्तार
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मधुलिका सिंह एवं नगर पुलिस अधीक्षक नुपुर उपाध्याय के मार्गदर्शन में विशेष टीम गठित की गई। मुखबिर की सूचना पर सिरगिट्टी क्षेत्र में घेराबंदी कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर अवैध उगाही और मारपीट की घटना स्वीकार कर ली। पुलिस ने घटनास्थल से टेंट और कुर्सियां भी जब्त की हैं।
अन्य आरोपियों की तलाश जारी
पुलिस ने मुख्य आरोपी को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद आसपास के गांवों में शांति का माहौल बना है और लोगों ने राहत की सांस ली है।
इस कार्रवाई में थाना प्रभारी बिल्हा निरीक्षक तोपसिंह नवरंग, पीएसआई करन राज बघेल, आकाश बंजारे, प्रीति पैकरा सहित थाना स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
![]() | ![]() | ![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |









































