
राजनांदगांव/14 अगस्त 26।जिस उम्र में किसी बच्चे के हाथ में खिलौने होने चाहिए, आंखों में सपने होने चाहिए और सिर पर माता-पिता का साया होना चाहिए, उसी उम्र में डोंगरगढ़ का एक 10 वर्षीय मासूम जिंदगी की ऐसी परिस्थितियों से लड़ रहा था, जिसकी कल्पना भी दिल दहला देती है। पिता की वर्षों पहले हत्या हो चुकी थी और मां भी उसे छोड़कर कहीं चली गई। घर में अकेला रह गया यह बच्चा धीरे-धीरे नशे और लड़ाई-झगड़े की गिरफ्त में पहुंच गया।
लेकिन उसकी कहानी का अंत निराशा में नहीं हुआ। पुलिस ने उसे महज एक अपरचारी बालक के रूप में नहीं देखा, बल्कि एक ऐसे मासूम के रूप में देखा जिसे सजा नहीं, सहारे और सही दिशा की जरूरत थी।
खेल के मैदान में हुई घटना ने खोल दी मासूम की दर्दनाक कहानी
मामला 9 अगस्त 2026 का है। चमगेंदरी पारा निवासी एक व्यक्ति ने थाना डोंगरगढ़ में शिकायत दर्ज कराई कि उसका नाबालिग पुत्र हाईस्कूल ग्राउंड में खेलने गया था, जहां करीब 10 वर्षीय बालक ने उसके पुत्र को आहत कर दिया।
पुलिस ने घटना की सूचना रोजनामचा सान्हा में दर्ज कर बालक को संरक्षणात्मक अभिरक्षा में लिया। पूछताछ और जानकारी जुटाने के दौरान पुलिस के सामने जो सच्चाई आई, उसने पूरे मामले को ही अलग रूप दे दिया।
पता चला कि इस बच्चे के सिर से पिता का साया कई साल पहले ही उठ चुका था। पिता की हत्या हो गई थी। इसके बाद मां भी उसे छोड़कर चली गई। घर में अकेले रहने वाला मासूम धीरे-धीरे गलत संगत और नशे की ओर बढ़ता गया। अकेलापन, उपेक्षा और असुरक्षित माहौल उसके व्यवहार में गुस्से और लड़ाई-झगड़े के रूप में दिखाई देने लगा।
पुलिस ने अपराध नहीं, बच्चे का दर्द देखा
मामला पुलिस अधीक्षक सुश्री अंकिता शर्मा के संज्ञान में आया तो उन्होंने बच्चे के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि उसे ऐसी जगह पहुंचाया जाए, जहां उसे सुरक्षित वातावरण, भोजन, देखभाल, काउंसलिंग और नशे की लत से बाहर निकलने के लिए उचित उपचार एवं संसाधन मिल सकें।
निर्देश के बाद डोंगरगढ़ डीएसपी प्रोबेशनर एवं थाना प्रभारी सुश्री सुमन जायसवाल ने बालक को न्यायालय/बाल कल्याण समिति, राजनांदगांव के समक्ष प्रस्तुत कराया। आवश्यक काउंसलिंग और वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसके बेहतर भविष्य और पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए उसे नई उम्मीद नशा मुक्ति केंद्र, रायपुर में दाखिल कराया गया।
एक बच्चे को ‘अपराधी’ नहीं, ‘मासूम’ समझने की पहल
डोंगरगढ़ पुलिस की यह कार्रवाई इसलिए खास है क्योंकि यहां कानून की प्रक्रिया के साथ मानवीय संवेदना को भी प्राथमिकता दी गई। जिस बच्चे के जीवन में माता-पिता का संरक्षण नहीं रहा, उसे उसके हालात के लिए अकेला छोड़ने के बजाय पुलिस ने उसके भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी उठाई।
शायद पहली बार उस मासूम को यह एहसास हुआ होगा कि वह पूरी तरह अकेला नहीं है। उसके सामने अब एक ऐसा रास्ता है, जहां नशे और हिंसा की जगह शिक्षा, अनुशासन, सुरक्षा और बेहतर भविष्य की उम्मीद हो सकती है।
यह कार्रवाई समाज के लिए भी एक बड़ा संदेश है—हर भटकता बच्चा अपराधी नहीं होता, कई बार वह परिस्थितियों का शिकार होता है। ऐसे बच्चों को दुत्कार नहीं, दिशा और सहारे की जरूरत होती है।
पुलिस अधीक्षक सुश्री अंकिता शर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर एवं एसडीओपी डोंगरगढ़ केशरी नंदन नायक के दिशा-निर्देशन में थाना प्रभारी डोंगरगढ़ प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षक सुश्री सुमन जायसवाल द्वारा की गई यह पहल इसी संवेदनशील सोच का उदाहरण है।
इस कार्रवाई में सहायक उप निरीक्षक मुजीब रहमान कुरैशी एवं आरक्षक नरेंद्र प्रजापति का भी सराहनीय योगदान रहा।
जिस मासूम ने बचपन में अपनों को खोया, उसे समाज ने शायद गलत समझ लिया था। लेकिन पुलिस ने उसके भीतर छिपे उस बच्चे को देखा, जिसे आज भी एक परिवार, एक सुरक्षित घर और एक नई जिंदगी की जरूरत है। अब उम्मीद है कि ‘नई उम्मीद’ से उसकी जिंदगी सच में एक नई शुरुआत करेगी।
![]() | ![]() | ![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |









































