
कोरबा। जिले में प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर एक प्रशिक्षु IAS अधिकारी पर सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि जिले में लगातार सामने आ रहे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों पर अधिकारी की चुप्पी अब “मौन स्वीकृति” के रूप में देखी जा रही है। खासकर प्रभावशाली संस्थाओं और रसूखदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने में प्रशासनिक ढिलाई को लेकर जनचर्चा तेज हो गई है।हालांकि पदस्थापना के दौरान महोदय ने भ्रष्टाचार के खिलाफ स्वयं का नंबर अपने अनुविभाग के विभिन्न कार्यालयों चस्पा करवा दिया था लेकिन अब वही अधिकारी फोन उठाना तो दूर उनसे व्हाट्सएप पर जनहित में चाही गई जानकारी इतनी नागवार गुजरी कि साहब ने नंबर ही ब्लॉक कर दिया तो आपको बता दें महानुभाव आंख बंद कर देने से दुनिया अंधेरा नहीं होता।आप एक जिम्मेदार पद पर आसीन है तो आपको हर पहलू पर जांच कर कार्यवाही करनी होगी।

सूत्रों के मुताबिक कई मामलों में शिकायतें और दस्तावेज सामने आने के बावजूद संबंधित विभागों पर कठोर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। आम लोगों का आरोप है कि छोटे मामलों में प्रशासन तुरंत सख्ती दिखाता है, लेकिन जब मामला किसी प्रभावशाली महारत्न संस्था या बड़े नेटवर्क से जुड़ा होता है, तब कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली जाती है।
जिले में अवैध गतिविधि पर्यावरण नियमों के उल्लंघन और शासकीय संपत्तियों के दुरुपयोग जैसे मामलों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से निर्णायक कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा और प्रशासन की साख पर भी सवाल खड़े होंगे। लोगों का यह भी कहना है कि एक IAS अधिकारी से निष्पक्ष और निर्भीक प्रशासन की अपेक्षा की जाती है, लेकिन जिले में वर्तमान स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है।
हालांकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब देखना होगा कि उठ रहे सवालों और बढ़ते जनदबाव के बीच प्रशासन प्रभावशाली संस्थाओं पर कार्रवाई करने का साहस दिखाता है या फिर चुप्पी का सिलसिला जारी रहेगा।
अगले अंक में महोदय जी का नाम सहित होगा प्रकाशित बने रहिए हमारे साथ।
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