
तीन दिवसीय प्रशिक्षण शुरू, 40 किसान और स्व-सहायता समूह की महिलाओं को दिया जा रहा व्यावहारिक प्रशिक्षण

जांजगीर-चांपा। जिले के कृषि विज्ञान केंद्र में मशरूम उत्पादन पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए 40 किसान एवं स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों, महिलाओं और युवाओं को कम लागत में अधिक लाभ देने वाली मशरूम खेती से जोड़कर स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय ने कहा कि धान के अवशेष (पैरा) से व्यवसायिक मशरूम उत्पादन जिले के युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार का सशक्त माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि जांजगीर-चांपा को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए स्वरोजगार आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देना आवश्यक है। किसानों के लिए पैरा का उपयोग कर मशरूम उत्पादन आय बढ़ाने का एक कम लागत और अधिक लाभ वाला विकल्प है।
एसपी ने कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानों, महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. के.डी. महंत ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीक, बीज उत्पादन, रखरखाव, विपणन और व्यवसायिक संभावनाओं की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। साथ ही मशरूम के पोषण एवं औषधीय महत्व पर भी विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिया। प्रशिक्षण में वीडियो, प्रायोगिक प्रदर्शन और आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर प्रतिभागियों को व्यावहारिक जानकारी प्रदान की जा रही है।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को प्रगतिशील महिला मशरूम उत्पादक सविता पटेल के प्रक्षेत्र का भ्रमण भी कराया गया, जहां उन्होंने मशरूम उत्पादन से जुड़े अपने अनुभव, चुनौतियां और व्यवसायिक लाभ साझा किए।
प्रशिक्षण में शामिल प्रतिभागी सुनीता ने कहा कि मशरूम उत्पादन का यह प्रशिक्षण ग्रामीण महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार का बेहतर माध्यम साबित होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इस तकनीक को अपनाकर गांव में ही अच्छी आय अर्जित की जा सकती है।
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