
सर्वाधिक समर्थन मूल्य से संबल, किसान अमर सिंह कंवर को मिला सीधा लाभ’
कोरबा, 29 जनवरी 2026/मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किसानों और खेती को सशक्त बनाने की दिशा में किए जा रहे निरंतर प्रयास आज जमीन स्तर पर सकारात्मक परिणाम दे रहे हैं। किसान हितैषी नीतियों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और किसानों के चेहरों पर संतोष एवं विश्वास साफ झलक रहा है। धान उपार्जन की प्रक्रिया सुचारू, सरल एवं पूर्णतः पारदर्शी बनाई गई है, जिससे किसानों को पूर्व में होने वाली परेशानियों से निजात मिली है।
कोरबा जिले के ग्राम गौरबोरा निवासी कृषक अमर सिंह कंवर इस सफल व्यवस्था का उदाहरण हैं। श्री कंवर द्वारा इस वर्ष 100 क्विंटल धान का विक्रय किया गया, जिसे उन्होंने सोनपुरी धान उपार्जन केंद्र में बेचा। गत वर्ष उन्होंने लगभग 150 क्विंटल धान का विक्रय किया था। वे लगभग 14 एकड़ भूमि में खेती कार्य करते हैं और शासन द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य प्राप्त होने से वे अत्यंत संतुष्ट हैं।
श्री कंवर ने बताया कि शासन की योजनाओं से आज किसान खुश हैं, क्योंकि सरकार ने किसानों की मेहनत को समझते हुए उन्हें उनकी उपज का उचित और सर्वाधिक समर्थन मूल्य प्रदान किया है। इससे वे अपनी पारिवारिक आवश्यकताओं और अन्य कार्यों को सहजता से पूरा कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह सहयोग और व्यवस्था न होती, तो खेती करना किसानों के लिए कठिन हो जाता।
उन्होंने यह भी बताया कि धान विक्रय हेतु समिति के माध्यम से टोकन प्राप्त किया, जिसमें किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं आई। टोकन जारी होने से लेकर अंतिम भुगतान प्रक्रिया तक समस्त कार्य सुचारू रूप से संपन्न हुआ। उपार्जन केंद्रों में बैठने, उठने सहित सभी आवश्यक सुविधाएं सुव्यवस्थित रूप से उपलब्ध हैं और किसानों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ रहा है।
उन्होंने मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार जिस प्रकार किसानों का साथ दे रही है, उससे किसानों का विश्वास और मजबूत हुआ है, छत्तीसगढ़ शासन का यह सहयोग और संवेदनशीलता भविष्य में भी इसी प्रकार बनी रहे, जिससे किसान निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते रहें।
![]() | ![]() | ![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |









































