
भारतीय हाथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान जांजगीर-चांपा को ‘स्वदेशी परियोजना’ से राष्ट्रीय पहचान की तैयारी


कोसा को मिलेगी नई उड़ान, आईआईएचटी बनेगा कोसा नवाचार, अनुसंधान एवं राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र का हब

जांजगीर-चांपा/ कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने भारतीय हाथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान जांजगीर-चांपा के सभाकक्ष में अधिकारियों की बैठक लेकर स्वदेशी परियोजना के विज़न, मिशन और रणनीतिक स्तंभों पर विस्तार से चर्चा की। यह त्रिवर्षीय परियोजना भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय हथकरघा विकास एवं हस्तशिल्प विकास परिषद के माध्यम से संचालित की जाएगी। बैठक का उद्देश्य जिले में बुनकरों के सर्वांगीण विकास, रेशम एवं हथकरघा गतिविधियों को सशक्त बनाने तथा शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन किया जाना है। बैठक में विद्यार्थियों, बुनकरों के लिए आजीविका संवर्धन, प्रशिक्षण, विपणन सुविधा, समूहों को सुदृढ़ करने तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को और मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा की गई। परियोजना की पूरी राशि सीएसपीजीएल मड़वा, गेल इंडिया, जेएसडब्ल्यू एमपीसीएल नरियरा के सीएसआर मद से वहन की जाएगी।
कलेक्टर श्री महोबे ने कहा कि इस परियोजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ के हाथकरघा इकोसिस्टम को मजबूत करने, पारंपरिक कौशल और आधुनिक बाजार की मांग के बीच की दूरी कम तथा स्थानीय बुनकरों के लिए रोज़गार व बाज़ार तक सीधी पहुँच सुनिश्चित की जाएगी। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि विद्यार्थियों, बुनकरों को योजनाओं का वास्तविक लाभ मिले, इसके लिए जमीनी स्तर पर कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। इस दौरान कलेक्टर ने आईआईएचटी के विभिन्न कक्षों एवं परिसर का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। इस दौरान जिला पंचायत सीईओ गोकुल रावटे, रेशम, हाथकरघा, एनआरएलएम विभाग के अधिकारी सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
बैठक में सलाहकार एनसीएचएचडी तरूण वेदी द्वारा पीपीटी के माध्यम से जिले के पारंपरिक हथकरघा के पुनर्निर्माण और सुदृढ़ीकरण हेतु विस्तृत कार्ययोजना के बारे में बताया गया। इस पहल के अंतर्गत राज्य के एकमात्र भारतीय हथकरघा प्रौद्योगिकी संस्थान, जांजगीर-चांपा को आधुनिक सुविधाओं से युक्त करते हुए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा। इस परियोजना के माध्यम से कोसा सिल्क जैसी विश्वविख्यात परंपरागत बुनकरी को तकनीक, डिज़ाइन नवाचार और बाजार से जोड़ा जाएगा। आने वाले वर्षों में आईआईएचटी में प्रतिवर्ष विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देने के साथ ही अधिक बुनकरों एवं कारीगरों को कौशल विकास, उद्यमिता और विपणन सहायता उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। परियोजना का उद्देश्य आईआईएचटी जांजगीर-चांपा को हाथकरघा एवं वस्त्र शिक्षा में राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र के रूप में स्थापित करना है, ताकि नवाचार, सततता और समावेशन के साथ भारत की समृद्ध हाथकरघा विरासत का संरक्षण व संवर्धन किया जा सके।
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