
कोरबा। विद्युत वितरण विभाग का दर्री कार्यालय इन दिनों खुद अपनी बदहाली की कहानी बयां कर रहा है। जिस विभाग की जिम्मेदारी लाखों लोगों तक सुरक्षित बिजली पहुंचाने की है, उसी विभाग के कर्मचारी और अधिकारी एक ऐसे जर्जर भवन में काम करने को मजबूर हैं, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
भवन की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि दीवारों में दरारें साफ दिखाई देती हैं, छत से प्लास्टर झड़ रहा है और कई हिस्से पूरी तरह कमजोर पड़ चुके हैं। यहां ड्यूटी करने वाले विद्युत ऑपरेटर हर दिन डर और असुरक्षा के माहौल में काम कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि बारिश के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब भवन के कई हिस्सों में पानी रिसने लगता है और विद्युत उपकरणों के बीच काम करना जोखिम भरा हो जाता है।
चिंता की बात यह है कि खतरा केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। बिजली की शिकायत और अन्य कार्यों के लिए रोजाना बड़ी संख्या में उपभोक्ता भी इस कार्यालय पहुंचते हैं। ऐसे में यदि भवन का कोई हिस्सा अचानक भरभराकर गिर जाता है तो दर्जनों लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है।
स्थानीय लोगों और कर्मचारियों का आरोप है कि भवन की जर्जर स्थिति से विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भलीभांति परिचित हैं, लेकिन इसके बावजूद नए भवन निर्माण या मरम्मत को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार क्यों कर रहा है? क्या किसी कर्मचारी या उपभोक्ता की जान जाने के बाद ही जिम्मेदारों की नींद खुलेगी?
जर्जर भवन में ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों ने मांग की है कि दर्री विद्युत वितरण कार्यालय के लिए तत्काल नए भवन का निर्माण कराया जाए या फिर कार्यालय को किसी सुरक्षित भवन में स्थानांतरित किया जाए, ताकि कर्मचारियों और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विभाग के आला अधिकारी इस गंभीर समस्या पर ध्यान देंगे या फिर किसी बड़े हादसे के बाद केवल जांच और कार्रवाई की औपचारिकता निभाई जाएगी? दर्री का यह जर्जर कार्यालय फिलहाल हर दिन एक संभावित दुर्घटना को खुला निमंत्रण देता नजर आ रहा है।
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