
बारिश में छत के नीचे बैठने की जगह भी छिनी, यात्री और विद्यार्थी खुले आसमान के नीचे भीगने को मजबूर

कोरबा। विकास और जनसुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करने वाले महारत्न कंपनी एनटीपीसी कोरबा प्रबंधन की कार्यशैली पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। भरी बरसात के बीच यात्रियों की सुविधा के लिए बने यात्री प्रतीक्षालय को तोड़ दिए जाने का मामला सामने आया है। प्रतीक्षालय टूटने के बाद बस का इंतजार करने वाले यात्रियों के साथ-साथ स्कूली विद्यार्थियों को भी बारिश में खड़े होकर बस का इंतजार करना पड़ रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऐसी कौन-सी मजबूरी थी कि बरसात के मौसम में ही यात्रियों के सिर से छत छीनने की कार्रवाई कर दी गई? जब बारिश अपने पूरे शबाब पर है, ऐसे समय में यात्री प्रतीक्षालय को तोड़ना एनटीपीसी प्रबंधन की संवेदनशीलता पर सवाल खड़ा करता है।
जिस छत के नीचे मिलता था सुकून, वहां अब बरस रहा पानी
यात्री प्रतीक्षालय का उद्देश्य ही यही था कि बस के इंतजार में खड़े यात्रियों और विद्यार्थियों को धूप-बारिश से राहत मिल सके। लेकिन प्रतीक्षालय हटते ही हालात पूरी तरह बदल गए हैं। बारिश के दौरान यात्री और विद्यार्थी सड़क किनारे भीगते हुए बस का इंतजार करने को मजबूर हैं।
तस्वीरें और मौके के हालात यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या जनसुविधा की कीमत पर प्रबंधन की निर्माण अथवा विकास संबंधी योजना ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है?
पहले कायाकल्प क्यों नहीं, पहले विध्वंस क्यों?
अगर यात्री प्रतीक्षालय को नया स्वरूप देना था, उसका कायाकल्प करना था या किसी विकास कार्य के कारण उसे हटाना आवश्यक था, तो क्या वैकल्पिक यात्री सुविधा उपलब्ध कराना एनटीपीसी प्रबंधन की जिम्मेदारी नहीं थी?
बरसात शुरू होने के बाद प्रतीक्षालय तोड़ना और उसके बाद यात्रियों को खुले में छोड़ देना व्यवस्था की संवेदनशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
विद्यार्थियों की परेशानी सबसे गंभीर
इस पूरे मामले में सबसे अधिक परेशानी विद्यार्थियों को उठानी पड़ रही है। सुबह और दोपहर के समय स्कूल-कॉलेज जाने और लौटने वाले छात्र-छात्राओं को बस के इंतजार में बारिश के बीच खड़ा होना पड़ रहा है। नन्हे विद्यार्थियों को भीगने से बचाने के लिए अभिभावक चिंतित हैं, लेकिन जिम्मेदार व्यवस्था मानो आंखें मूंदे बैठी है।
जनता पूछ रही—जवाब देगा कौन?
एनटीपीसी जैसी बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की संस्था से आम जनता संवेदनशील और जिम्मेदार कार्यप्रणाली की उम्मीद करती है। ऐसे में यात्री प्रतीक्षालय तोड़े जाने के बाद पैदा हुई परेशानी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—
- बरसात के बीच यात्री प्रतीक्षालय तोड़ने की जरूरत क्यों पड़ी?
- क्या प्रतीक्षालय तोड़ने से पहले कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई?
- यात्रियों और विद्यार्थियों की सुविधा का ध्यान क्यों नहीं रखा गया?
- यदि नया प्रतीक्षालय बनाया जाना है तो उसका निर्माण कब तक पूरा होगा?
- तब तक बारिश में यात्रियों की परेशानी का जिम्मेदार कौन होगा?
जनता को विकास चाहिए, लेकिन ऐसा विकास नहीं जिसमें पहले सुविधा छीनी जाए और बाद में आश्वासन दिया जाए।
एनटीपीसी प्रबंधन को तत्काल मामले का संज्ञान लेकर यात्रियों और विद्यार्थियों के लिए अस्थायी शेड अथवा वैकल्पिक प्रतीक्षालय की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि बरसात में लोगों को खुले आसमान के नीचे खड़े होकर बस का इंतजार न करना पड़े।
![]() | ![]() | ![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |









































