
कोरबा, 02 मार्च। छत्तीसगढ़ के पॉवर हब कहे जाने वाले कोरबा में हड़कंप मचाने वाला रहस्यों सामने आया है, जहां शहर की जीवनरेखा हसदेव नदी अब प्रदूषण के गंभीर खतरे से जूझ रही है।निगम आयुक्त द्वारा कटघोरा SDM को लिखे पत्र में उल्लेख है कि हसदेव ताप विद्युत गृह (पश्चिम) से निकलने वाला राखड़ युक्त जहरीला पानी सीधे उस नहर से नदी में छोड़ा जा रहा है, जिससे शहर को पीने का पानी मिलता है। इस घटना ने न सिर्फ प्रशासन बल्कि आम जनता की चिंता भी बढ़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक, इस राखड़ युक्त पानी में मौजूद खतरनाक रसायन पेयजल को दूषित कर रहे हैं। इससे जलजनित बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि लंबे समय तक ऐसा पानी इस्तेमाल होने पर स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। मामला यहीं नहीं रुकता। नदी में बढ़ती राखड़ की मात्रा इंटेकवेल सिस्टम को भी प्रभावित कर रही है, जिससे शहर की जल आपूर्ति पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। अगर हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले दिनों में पानी की सप्लाई भी बाधित हो सकती है। नगर निगम ने इसे पर्यावरण नियमों का खुला उल्लंघन बताया है और तुरंत प्रभाव से प्रदूषण रोकने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों और प्लांट प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की गई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या समय रहते इस पर रोक लगेगी या कोरबा के लोगों को जहरीला पानी पीने के लिए छोड़ दिया जाएगा? शहर में इस मुद्दे को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है और लोग जवाब मांग रहे हैं।

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