
राखड़ बांध का फूटना : ‘हादसा’ या गैर इरादतन हत्या है!
कोरबा। हसदेव ताप विद्युत कंपनी दर्री पश्चिम नवागांव कला ग्राम पंचायत के झाबू स्थित राखड़ बांध टूटना कोई अचानक हुई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और लापरवाही का वह ‘खूनी खेल’ है जिसकी कीमत एक गरीब परिवार के होनहार,मेहनतकश 21 वर्षीय जेसीबी ऑपरेटर हुलेश्वर को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
हैरान करने वाली सच्चाई

पाँच दिन पहले जारी हुआ निलंबन आदेश साफ़ गवाही दे रहा है कि आला अधिकारियों को आने वाले खतरे का बखूबी अंदाज़ा था। जब सब कुछ पता था, तो मरम्मत में सावधानी क्यों नहीं रखी गई ? सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम क्यों नहीं किए गए?
मिलीभगत का नतीजा
यह स्पष्ट है कि अधिकारियों और ठेकेदारों की जुगलबंदी ने चंद रुपयों के मुनाफे के लिए सुरक्षा मानकों को ताक पर रख दिया। रसूखदारों के इस गठजोड़ ने एक मेहनतकश की जान ले ली।
क्या निलंबन की कागजी कार्रवाई काफी है?
क्या दोषी अधिकारियों और ठेकेदार पर हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं होना चाहिए?कब तक विकास के नाम पर गरीबों की बलि दी जाती रहेगी?इस सिस्टम की चुप्पी और अनदेखी ने आज एक परिवार का चिराग बुझा दिया है।
जल्द खुलासा होगा उस भ्रष्ट अधिकारी और छुटभैया नेता का नाम जिन्होंने गाढ़ी कमाई के लालच में करवाते हैं गुणवत्ताविहीन कार्य



