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नया बाराद्वार में अन्नपूर्णा राइस मिल के आगे लाचार है सिंचाई विभाग? क्रान्ति सेना ने कलेक्टर जनदर्शन में की लिखित शिकायत

सक्ति। छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने सक्ती जिले के नवा बाराद्वार तहसील के अंतर्गत आने वाले सब-माइनर नहर की शासकीय भूमि पर अन्नपूर्णा राइस मिल के संचालक द्वारा किए गए अतिक्रमण और पर्यावरण प्रदूषण को लेकर जिला कलेक्टर से तीखी शिकायत की है। आरोप है कि क्षेत्र में संचालित अन्नपूर्णा राइस मिल के संचालक ने अपने निजी व्यावसायिक लाभ के लिए न केवल सिंचाई विभाग की जमीन और सड़क पर अवैध कब्जा कर लिया है बल्कि किसानों के पारंपरिक रास्ते को भी पूरी तरह से बंद कर दिया है।

शिकायत पत्र के अनुसार किसानों की फसलों की सिंचाई के लिए निर्मित मेन कैनाल की पलाही सब-माइनर नहर की शासकीय भूमि एवं अन्य संलग्न जमीनों पर रसूखदार अनावेदकों द्वारा अवैध कब्जा कर कुछ भू भाग पर राइस मिल से सम्बंधित कार्य किया जा रहा है। हद तो तब हो गई जब मिल संचालक ने नहर की सरकारी भूमि को अपनी निजी जागीर समझते हुए वहां से आम जनता और किसानों के आने-जाने वाले पारंपरिक मार्ग को रोककर अपना निजी रास्ता बना लिया।

आरोप बेहद गंभीर हैं। शिकायत में बताया गया है कि राइस मिल से निकलने वाला जहरीला, बदबूदार और उसना मिल का गंदा अपशिष्ट पानी सीधे सिंचाई नहर में बहाया जा रहा है।

जिससे नहर का पानी इतना दूषित और बदबूदार हो जाता है कि यह न तो इंसानों के इस्तेमाल के लायक बचा रहता है और न ही मवेशियों के पिने के लिए। इस दूषित जल के कारण आसपास के गांवों में गंभीर संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा पैदा हो गया है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों और रहवासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन मिल संचालक के रसूख के कारण खुलकर विरोध करने से कतराते है l इसी मनमानी के खिलाफ छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रदेश पदाधिकारी ने लिखित शिकायत जिला कलेक्टर से की है l

क्रान्ति सेना के प्रदेश प्रमुख आर.टी.आई. विंग जितेन्द्र कुमार साहू ने बताया कि इस संबंध में पहले भी स्थानीय स्तर पर मौखिक शिकायतें की गई थीं। लेकिन मिल संचालकों के कथित रसूख और ऊंचे संपर्कों के कारण अधीनस्थ अधिकारियों ने अब तक कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की। प्रशासन की इसी सुस्ती के कारण आज क्षेत्र के किसानों और आम जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।

सक्ति कलेक्टर से की गई मांगो मे सिंचाई विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम गठित कर उक्त खसरा नंबरों की तत्काल सरकारी नापी सीमांकन की जाए। और शासकीय नहर की भूमि से अवैध कब्जे को तुरंत हटाकर आम जनता के लिए सार्वजनिक रास्ता बहाल किया जाए, इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण मंडल के नियमों की धज्जियां उड़ाकर नहर में गंदा पानी बहाने वाली इस मिल संचालक पर तवारित कार्रवाई किया जाए।

अब देखना यह होगा कि सुशासन का दावा करने वाला प्रशासन इन रसूखदारों पर क्या हंटर चलाता है या फिर अन्नपूर्णा राइस मिल का यह अवैध खेल यूं ही जारी रहेगा।

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