
कोरबा। नगर पालिक निगम कोरबा में जनप्रतिनिधियों की कथित अनदेखी अब बड़े राजनीतिक विवाद का रूप लेती दिख रही है। निगम सभापति नूतन सिंह ठाकुर ने अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए साफ कहा है कि निगम प्रशासन चुने हुए जनप्रतिनिधियों को लगातार अपमानित कर रहा है और लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का काम कर रहा है।

सभापति ने आरोप लगाया कि 6 जून को आयोजित कई लोकार्पण कार्यक्रमों की जानकारी न तो संबंधित पार्षदों को दी गई और न ही निगम क्षेत्र के प्रथम नागरिक महापौर तथा निगम अध्यक्ष को। उन्होंने इसे महज प्रशासनिक चूक मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह जनप्रतिनिधियों को सुनियोजित तरीके से दरकिनार करने की कोशिश है।

“क्या अब अफसर ही चलाएंगे लोकतंत्र?”
नूतन सिंह ठाकुर ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जब जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को ही कार्यक्रमों से दूर रखा जाएगा, तो फिर लोकतंत्र और जनादेश का सम्मान कहां रह जाएगा। उन्होंने कहा कि निगम के अधिकारी अपनी मनमानी पर उतर आए हैं और जनप्रतिनिधियों को केवल औपचारिकता बनाकर छोड़ देना चाहते हैं।
अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं तो जमीन पर बैठेंगे सभापति
सभापति ने निगम प्रशासन को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सोमवार तक जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे निगम कार्यालय में अपनी कुर्सी छोड़कर जमीन पर बैठकर काम करेंगे। उनका कहना है कि यह कदम जनप्रतिनिधियों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए उठाया जाएगा।
निगम में बढ़ा टकराव, राजनीति गरमाई
सभापति के इस सख्त रुख के बाद निगम की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। पार्षदों के बीच भी नाराजगी की चर्चा है और कई जनप्रतिनिधि खुलकर इस मुद्दे पर आवाज उठाने की तैयारी में हैं। राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर चुने हुए जनप्रतिनिधियों को कार्यक्रमों की जानकारी से दूर रखने के पीछे जिम्मेदार कौन है और क्या मंशा है?
सबसे बड़ा सवाल
क्या निगम प्रशासन जनप्रतिनिधियों की नाराजगी को गंभीरता से लेते हुए जवाबदेही तय करेगा, या फिर यह विवाद आने वाले दिनों में आंदोलन और आमने-सामने की लड़ाई में बदल जाएगा?
फिलहाल कोरबा निगम में एक बात साफ दिख रही है—जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच विश्वास का संकट गहराता जा रहा है, और इसका असर अब खुलकर सियासी मंच पर दिखाई देने लगा है।
यह खबर संबंधित जनप्रतिनिधि द्वारा लगाए गए आरोपों और सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जा सकता है।
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