
रायगढ़, 16 जून। थाना कोतरारोड में आबकारी एक्ट के तहत गिरफ्तार किए गए संजय बघेल की न्यायिक अभिरक्षा के दौरान हुई मौत के मामले में जिला पुलिस रायगढ़ ने अपना पक्ष सार्वजनिक किया है। पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर थाना परिसर के सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल दस्तावेज और कार्रवाई से जुड़े तथ्यों को मीडिया के सामने रखा।
एसएसपी ने बताया कि संजय बघेल (32 वर्ष), निवासी नवापारा, को 10 जून को अवैध रूप से 30 लीटर कच्ची महुआ शराब के साथ गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के अनुसार मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए आरोपी को दोपहर 12:43 बजे थाना कोतरारोड लाया गया और सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर दोपहर 2:15 बजे उसकी विधिवत गिरफ्तारी दर्ज की गई।
पुलिस द्वारा जारी सीसीटीवी फुटेज के अनुसार गिरफ्तारी के बाद संजय बघेल को बंदीगृह के बाहर बैठाया गया, उसे पानी और भोजन उपलब्ध कराया गया तथा परिजनों से मिलने की अनुमति भी दी गई। फुटेज में वह अपने भाई अजय बघेल और अन्य परिजनों से सामान्य बातचीत करते हुए दिखाई देता है।
पुलिस का दावा है कि शाम 4:35 बजे आरोपी को चिकित्सीय परीक्षण और न्यायालयीन प्रक्रिया के लिए थाना से रवाना किया गया। मेडिकल जांच के दौरान उसने किसी चोट या शारीरिक परेशानी की शिकायत नहीं की तथा चिकित्सकों ने उसे फिट बताया। इसके बाद शाम लगभग 6:30 बजे उसे जेल दाखिल कराया गया।
मामले में मृतक के परिजनों ने पुलिस पर मारपीट और अवैध रूप से रुपये लेने के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने मारपीट के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज में कहीं भी आरोपी के साथ दुर्व्यवहार या मारपीट दिखाई नहीं देती।
हालांकि रुपये लेने की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी ने मामले के जांचकर्ता प्रधान आरक्षक श्यामदेव साहू और आरक्षक शंभू चौहान को तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर दिया है। शिकायत की जांच डीएसपी मुख्यालय स्तर पर कराई जा रही है।
पुलिस ने यह भी बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर मिले चोट के निशानों को मृत्यु का प्रत्यक्ष कारण नहीं माना गया है। मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विसरा एवं हिस्टोपैथोलॉजिकल परीक्षण की अनुशंसा की गई है।
फिलहाल मामले की न्यायिक जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच में पूरा सहयोग किया जा रहा है और अंतिम रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
![]() | ![]() | ![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |
![]() |









































