
कोरबा। भारतीय जनता पार्टी जिला कोरबा द्वारा प्रेस क्लब, तिलक भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में धरसींवा विधायक एवं भाजपा नेता अनुज शर्मा ने आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय बताते हुए कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल देश में तानाशाही शासन का प्रतीक था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सत्ता बचाने के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया और जनता के मौलिक अधिकारों का हनन किया।
अनुज शर्मा ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निर्वाचन को अवैध घोषित किए जाने के बाद सत्ता बचाने के उद्देश्य से आपातकाल लागू किया गया। इसके बाद विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हजारों कार्यकर्ताओं को जेलों में बंद कर दिया गया। लोकनायक जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मोरारजी देसाई और जॉर्ज फर्नांडिस जैसे नेताओं को भी कारावास का सामना करना पड़ा।
पत्रकारिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हुआ था सबसे बड़ा प्रहार
विधायक शर्मा ने कहा कि आपातकाल के दौरान प्रेस की स्वतंत्रता पर अभूतपूर्व हमला किया गया। समाचार पत्रों पर सेंसरशिप लगाई गई, कई अखबारों के प्रकाशन पर रोक लगाई गई और पत्रकारों को मीसा कानून के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। उन्होंने कहा कि मीडिया की आवाज दबाकर लोकतंत्र को बंधक बनाने का प्रयास किया गया था।
उन्होंने कहा कि देश की युवा पीढ़ी को आपातकाल की सच्चाई से परिचित कराना आवश्यक है ताकि भविष्य में लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक अधिकारों पर किसी प्रकार का संकट न आने पाए। भाजपा लोकतंत्र की रक्षा और संविधान के प्रति जनजागरूकता के लिए लगातार अभियान चला रही है।
प्रेस वार्ता में महापौर संजू देवी राजपूत, पूर्व महापौर जोगेश लांबा, पूर्व जिलाध्यक्ष अशोक चावलानी, जिला उपाध्यक्ष योगेश जैन, जिला सह कोषाध्यक्ष नवीन अरोड़ा, जिला मीडिया प्रभारी अर्जुन गुप्ता, जिला सह संयोजक सोशल मीडिया नीरज ठाकुर, मंडल अध्यक्ष डॉ. राजेश राठौर, योगेश मिश्रा, राकेश नागरमल अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया के पत्रकार उपस्थित रहे।
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