
कोरबा। एनटीपीसी कोरबा के आवासीय परिसर से प्लांट के स्टोर तक कबाड़ परिवहन में बरती गई गंभीर लापरवाही सोमवार को बड़े हादसे का कारण बन सकती थी। मासदा वाहन क्रमांक CG 13 AZ 0783 का चालक सुनील कुमार गौड़ बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम के कबाड़ लेकर मुख्य मार्ग से गुजर रहा था। परिवहन के दौरान वाहन से लोहे का कबाड़ सड़क पर गिरता रहा, जिससे राहगीरों और अन्य वाहन चालकों की जान जोखिम में पड़ गई।
सूचना मिलते ही थाना दर्री पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए वाहन को रोककर अपने कब्जे में लिया। चालक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 285 एवं 184 के तहत वैधानिक कार्रवाई की गई। पुलिस की समय पर की गई कार्रवाई से एक संभावित बड़ा सड़क हादसा टल गया।
एनटीपीसी के सेफ्टी सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल
घटना के बाद एनटीपीसी कोरबा के सेफ्टी प्रबंधन पर सवाल खड़े हो गए हैं। देश की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों में शामिल एनटीपीसी के परिसर से यदि इस तरह खुलेआम असुरक्षित तरीके से कबाड़ का परिवहन होता है, तो सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी पर सवाल उठना स्वाभाविक है। यदि पुलिस समय पर हस्तक्षेप नहीं करती, तो सड़क पर गिर रहे लोहे के कबाड़ से किसी भी राहगीर या वाहन चालक की जान जा सकती थी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भारी कबाड़ के परिवहन में सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है। वाहन को पूरी तरह ढंककर और सामग्री को मजबूती से बांधकर ही सड़क पर उतारा जाना चाहिए। इस मामले में स्पष्ट रूप से सुरक्षा नियमों की अनदेखी दिखाई दे रही है।
जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ता दिखा प्रबंधन
मामले में नगर प्रशासन, एनटीपीसी के एजीएम अतुल श्रीराम पाटिल से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि परिवहन के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी ठेकेदार की होती है, इसमें एनटीपीसी की कोई जिम्मेदारी नहीं होती।
हालांकि इस जवाब के बाद यह सवाल और गहरा गया है कि यदि परिवहन एनटीपीसी परिसर और उसके कार्य से जुड़ा है, तो सुरक्षा मानकों की निगरानी और अनुपालन सुनिश्चित करने की जवाबदेही आखिर किसकी है? क्या केवल जिम्मेदारी ठेकेदार पर डाल देने से संस्थान की निगरानी संबंधी भूमिका समाप्त हो जाती है, या फिर इस पूरे मामले में जवाबदेही तय की जानी चाहिए?
अब निगाहें इस बात पर हैं कि एनटीपीसी प्रबंधन इस घटना की जांच कर भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए ठोस कदम उठाता है या नहीं।
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