पर्यावरण संरक्षण मंडल की कार्रवाई के बाद एनटीपीसी ने जमा की जुर्माना की पूरी रकम, राखड़ प्रबंधन व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

कोरबा। बिजली उत्पादन के साथ निकलने वाली राखड़ के प्रबंधन में लापरवाही एनटीपीसी पर भारी पड़ गई है। निर्धारित स्थानों के बाहर राखड़ डंप किए जाने के दो मामलों में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने एनटीपीसी प्रबंधन पर कुल 1.05 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। कार्रवाई के बाद एनटीपीसी ने जुर्माने की पूरी राशि जमा कर दी है।
मामला सामने आने के बाद एनटीपीसी की राखड़ परिवहन, निगरानी और प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आखिर निर्धारित स्थल के बाहर इतनी बड़ी मात्रा में राखड़ कैसे पहुंची और निगरानी तंत्र को इसकी भनक क्यों नहीं लगी, यह सवाल अब चर्चा में है।
दो ठिकानों पर मिली थी करीब 7 हजार टन राखड़
पर्यावरण संरक्षण मंडल की कार्रवाई के दौरान छुरीखुर्द में करीब 6 हजार टन तथा रूमगढ़ा हवाई पट्टी के पास करीब 1 हजार टन राखड़ अवैध रूप से डंप मिली थी। यानी दोनों स्थानों को मिलाकर करीब 7 हजार टन राखड़ निर्धारित व्यवस्था से बाहर मिली।
छुरीखुर्द मामले में 90 लाख रुपये तथा रूमगढ़ा हवाई पट्टी के पास राखड़ डंपिंग के मामले में 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। दोनों मामलों में कुल जुर्माना 1 करोड़ 5 लाख रुपये रहा।
नियमों की अनदेखी पर पर्यावरण संरक्षण मंडल की कार्रवाई
पर्यावरण संरक्षण मंडल अधिकारी प्रसन्ना सोनकर ने बताया की निर्धारित व्यवस्था के विपरीत राखड़ डंप किए जाने और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के आधार पर कार्रवाई की गई थी। जुर्माना जमा करने के बाद एनटीपीसी प्रबंधन द्वारा सुधारात्मक कदम उठाए जाने की बात कही गई है।
अब राखड़ परिवहन करने वाले वाहनों की सतत निगरानी की जा रही है, ताकि निर्धारित स्थल के बाहर राखड़ डंप किए जाने की पुनरावृत्ति न हो।
1.05 करोड़ जमा, लेकिन सवाल अभी बाकी
जुर्माना जमा कर देने से मामला भले ही आर्थिक रूप से निपट गया हो, लेकिन करीब 7 हजार टन राखड़ निर्धारित स्थान से बाहर कैसे पहुंची? इस सवाल का जवाब राखड़ प्रबंधन की पूरी व्यवस्था पर रोशनी डाल सकता है।
एनटीपीसी जैसी बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली उत्पादन कंपनी के लिए राखड़ प्रबंधन महज औपचारिकता नहीं, बल्कि पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी है। ऐसे में दो अलग-अलग स्थानों पर हजारों टन राखड़ का मिलना निगरानी व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है।
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि एनटीपीसी प्रबंधन द्वारा किए जा रहे सुधारात्मक कदम कितने प्रभावी साबित होते हैं और भविष्य में निर्धारित स्थल से बाहर राखड़ डंपिंग पर पूरी तरह रोक लग पाती है या नहीं।





