हरे-भरे पेड़ को पहले उखाडा गया, फिर पास में गड्ढा खोदकर दोबारा खड़ा करने की कोशिश; पर्यावरण संरक्षण को लेकर उठी चिंता

कोरबा। औद्योगिक नगरी कोरबा में पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। NTPC कोरबा परिसर से जुड़े एक मामले में JCB मशीन की मदद से हरे-भरे पेड़ को उखाड़े जाने का मामला सामने आया है। घटनास्थल की तस्वीरों में JCB मशीन, उखड़ा हुआ पेड़ और जमीन पर खुदाई के निशान दिखाई दे रहे हैं। वहीं, दूसरी तस्वीर में पेड़ के पास बड़ा गड्ढा और मिट्टी का ढेर नजर आ रहा है।
मामले को लेकर पेड़ को JCB से उखाड़ने की कार्रवाई कैमरे में कैद होने के बाद पास में ही गड्ढा खोदकर पेड़ को दोबारा खड़ा करने का किया गया। इस पूरे घटनाक्रम में संबंध में परियोजना प्रमुख किशोर चंद्र पात्र का कहना है कि इस तरह पेड़ का शिफ्टिंग किया जाता है जो भविष्य में निश्चित ही जीवित रहेगा।
कैमरे में कैद तस्वीरों ने खड़े किए सवाल
घटनास्थल की तस्वीरों में पेड़ उखड़ा हुआ दिखाई दे रहा है और पास में खुदाई का काम भी नजर आ रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर हरे-भरे पेड़ को हटाने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या इसके लिए संबंधित विभाग से अनुमति ली गई थी? यदि पेड़ को दूसरी जगह लगाने की योजना थी, तो क्या उसे वैज्ञानिक तरीके से स्थानांतरित करने की प्रक्रिया अपनाई गई?
पर्यावरण संरक्षण के दावों पर उठे सवाल
कोरबा जैसे औद्योगिक क्षेत्र में हरित क्षेत्र और पेड़ों का संरक्षण पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ऐसे में यदि किसी हरे-भरे पेड़ को बिना उचित प्रक्रिया के उखाड़ा गया है, तो यह गंभीर जांच का विषय हो सकता है। पेड़ को केवल दूसरी जगह खड़ा कर देना पर्याप्त नहीं है; उसके सुरक्षित पुनर्रोपण और जीवित रहने की व्यवस्था भी जरूरी होती है।
निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग
इस मामले में संबंधित प्रबंधन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए कि पेड़ को हटाने की कार्रवाई किस उद्देश्य से की गई, इसके लिए अनुमति ली गई थी या नहीं और पेड़ के संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए गए। साथ ही, घटनास्थल की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग भी उठ रही है।
अब बड़ा सवाल यह है कि हरे-भरे पेड़ को उखाड़ने की जरूरत क्यों पड़ी और क्या इस कार्रवाई में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नियमों का पालन किया गया?





