
बिलासपुर। पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज राम गोपाल गर्ग ने 7 अगस्त को ‘सशक्त’ ऐप को लेकर रेंज स्तरीय समीक्षा बैठक ली। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा, जांजगीर, मुंगेली, सारंगढ़ और सक्ती समेत रेंज के जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक, एएसपी, डीएसपी, थाना प्रभारी तथा नवपदस्थ प्रशिक्षु उप निरीक्षक शामिल हुए।

बैठक का मुख्य फोकस चोरी के दोपहिया और चारपहिया वाहनों की त्वरित पहचान, ट्रैकिंग और शत-प्रतिशत रिकवरी पर रहा। आईजी ने अधिकारियों को ‘सशक्त’ ऐप में वाहन चोरी से संबंधित डेटा को अपडेट रखने और लंबित प्रविष्टियों को जल्द पूरा करने के सख्त निर्देश दिए।
24 घंटे में अधूरा डेटा पूरा करने के निर्देश
आईजी ने वाहन चोरी के प्रकरणों में जिन मामलों में इंजन नंबर या चेसिस नंबर दर्ज नहीं हैं, उन्हें 24 घंटे के भीतर वाहन पोर्टल के माध्यम से अपडेट करने के निर्देश दिए। साथ ही एफआईआर दर्ज होते ही वाहन की पूरी जानकारी ‘सशक्त’ ऐप में तत्काल दर्ज करने और प्रत्येक एफआईआर में इंजन एवं चेसिस नंबर स्पष्ट रूप से अंकित करने को कहा गया।
रेलवे स्टेशन से बाजार तक होगी संदिग्ध वाहनों की जांच
पुलिस को रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, बाजार, सराफा क्षेत्र और सार्वजनिक पार्किंग स्थलों पर ‘सशक्त’ ऐप के जरिए संदिग्ध वाहनों की जांच बढ़ाने के निर्देश दिए गए। पार्किंग ठेकेदारों और कर्मचारियों को भी ऐप पर यूजर बनाकर जांच अभियान से जोड़ने की बात कही गई।
नवपदस्थ डीएसपी, निरीक्षक, उप निरीक्षक एवं अन्य कर्मचारियों का ऐप पर शत-प्रतिशत पंजीयन कराने के साथ ही नए यूजर्स को प्रतिदिन कम से कम 20 संदिग्ध वाहनों की जांच का लक्ष्य दिया गया है।
बरामद वाहनों का तत्काल होगा बैक-एंड अपडेट
बैठक में बरामद या रिकवर किए गए वाहनों की जानकारी तत्काल बैक-एंड में अपडेट करने के निर्देश दिए गए, ताकि वाहन सुपुर्दगी की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और रिकॉर्ड में दोहराव की स्थिति न बने।
साइबर ठगी के पैसे वापस दिलाने MRM का लाइव प्रेजेंटेशन
बैठक में मुंगेली एसपी भोजराम पटेल ने साइबर फ्रॉड के पीड़ितों को उनकी राशि वापस दिलाने के लिए अपनाए जा रहे मनी रिकवरी मैकेनिज्म (MRM) का लाइव प्रेजेंटेशन दिया।
उन्होंने बताया कि साइबर हेल्पलाइन 1930 और संबंधित पोर्टल के माध्यम से शिकायत मिलते ही पुलिस त्वरित कार्रवाई कर आरोपी के बैंक खाते में मौजूद राशि को होल्ड/फ्रीज कराने का प्रयास करती है। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद राशि पीड़ित के मूल बैंक खाते में वापस कराई जा रही है।
एसपी पटेल ने साइबर ठगी के मामलों में ‘गोल्डन ऑवर’ यानी शुरुआती 1 से 2 घंटे को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ठगी के तुरंत बाद 1930 पर शिकायत दर्ज कराने से रकम को सुरक्षित ब्लॉक कराने की संभावना बढ़ जाती है।
तकनीक आधारित पुलिसिंग को सर्वोच्च प्राथमिकता
आईजी राम गोपाल गर्ग ने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से पारदर्शी और परिणाममूलक पुलिसिंग स्थापित करना बैठक का मुख्य उद्देश्य है। ‘सशक्त’ ऐप चोरी के वाहनों को खोजने और अपराधियों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण तकनीकी माध्यम है। उन्होंने सभी अधिकारियों को ऐप का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करने तथा थानों में लंबित प्रकरणों को कम कर आम जनता को त्वरित लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए।
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