
अब व्हीलचेयर के सहारे नहीं, इलेक्ट्रॉनिक व्हीलचेयर से आत्मनिर्भर होकर कॉलेज पहुंचेंगे ऋषभ जैन
कोरबा, 05 अगस्त 2026। कभी कॉलेज पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं था, घर से बाहर निकलने के लिए भी दूसरों की मदद लेनी पड़ती थी। दिव्यांगता के कारण कदम भले ही सीमित थे, लेकिन सपनों की उड़ान कभी सीमित नहीं हुई। अब पोड़ी बहार निवासी बीएससी माइक्रोबायोलॉजी द्वितीय वर्ष के छात्र ऋषभ जैन के लिए मुश्किलों का यह दौर पीछे छूटने वाला है।
ऋषभ की परेशानी सामने आई तो कलेक्टर कुणाल दुदावत ने संवेदनशीलता दिखाते हुए महज एक दिन में उनकी समस्या का समाधान करा दिया। ऋषभ ने 3 अगस्त 2026 को इलेक्ट्रॉनिक व्हीलचेयर उपलब्ध कराने के लिए कलेक्टर के समक्ष आवेदन दिया था। कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
आवेदन के अगले ही दिन मिला सहारा
प्रशासनिक पहल का असर ऐसा रहा कि 4 अगस्त को ही ऋषभ को इलेक्ट्रॉनिक व्हीलचेयर और एल्बो क्रच उपलब्ध करा दिए गए। अब उन्हें कॉलेज आने-जाने और दैनिक कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने की मजबूरी काफी हद तक कम होगी।
इलेक्ट्रॉनिक व्हीलचेयर मिलने के बाद ऋषभ के चेहरे पर खुशी साफ नजर आई। उनके लिए यह महज एक उपकरण नहीं, बल्कि शिक्षा, आत्मनिर्भरता और अपने सपनों की ओर आगे बढ़ने का नया साधन है।
ऋषभ ने कहा कि यह सहायता उनके लिए नई जिंदगी मिलने जैसी है। अब वे अधिक आसानी से कॉलेज जा सकेंगे और अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए भविष्य के सपनों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे। उन्होंने त्वरित सहायता के लिए कलेक्टर कुणाल दुदावत और जिला प्रशासन के प्रति आभार जताया।
संवेदनशील प्रशासन का दिखा मानवीय चेहरा
ऋषभ की कहानी इस बात का उदाहरण है कि जब प्रशासनिक संवेदनशीलता के साथ त्वरित निर्णय लिया जाता है, तो सरकारी योजनाओं और सहायता का वास्तविक लाभ जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचता है।
जिला प्रशासन की यह पहल दिव्यांगजनों को सम्मान, आत्मनिर्भरता और समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम के रूप में सामने आई है।
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