
मूलभूत सुविधाओं से लेकर आजीविका तक पहल के निर्देश, बांस शिल्प को बाजार से जोड़ने की बनेगी कार्ययोजना


कोरबा, 06 अगस्त 2026।तेज बारिश, कीचड़ भरे रास्ते और दुर्गम पहाड़ी इलाका भी कलेक्टर कुणाल दुदावत के कदम नहीं रोक सका।बुधवार को वे पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के दूरस्थ ग्राम समेलीभांठा स्थित विशेष पिछड़ी जनजाति बिरहोर बस्ती पहुंचे और ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं। कलेक्टर को अपने बीच पाकर ग्रामीणों के चेहरों पर आश्चर्य के साथ खुशी और उम्मीद भी नजर आई।
कलेक्टर ने बारिश के बीच गांव के स्कूल और आंगनबाड़ी भवन का निरीक्षण किया। इसके बाद एक कमरे में बिरहोर परिवारों के साथ चौपाल लगाकर उनकी समस्याएं जानीं। उन्होंने ग्रामीणों से आत्मीयता से कहा कि वे उनकी स्थिति जानने और समस्याओं का समाधान करने के लिए यहां आए हैं, इसलिए बिना संकोच अपनी बात रखें।
शुरुआत में ग्रामीण झिझके, लेकिन कलेक्टर के सहज व्यवहार के बाद उन्होंने एक-एक कर अपनी समस्याएं सामने रखीं। ग्रामीणों ने बिजली और पेयजल, जर्जर स्कूल भवन की मरम्मत, स्कूल की बाउंड्रीवाल, मिडिल स्कूल की आवश्यकता तथा आवागमन के लिए पुल निर्माण सहित विभिन्न मांगें रखीं। भुडूपानी मोहल्ले के ग्रामीणों ने भी पेयजल और बिजली की समस्या बताई।
बिजली, पानी और शिक्षा सुविधाओं पर तत्काल पहल
ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुनने के बाद कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने समेलीभांठा के स्कूल एवं आंगनबाड़ी भवन की मरम्मत, पेयजल के लिए बोर एवं सोलर ड्यूल पंप, विद्युत लाइन विस्तार, स्कूल की बाउंड्रीवाल, तालाब एवं पुल निर्माण सहित अन्य कार्यों के लिए पहल करने कहा।
स्कूल के पास लगे बिजली के खंभे को हटाने, खेतों की जुताई के लिए आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराने तथा भुडूपानी में पेयजल समस्या दूर करने के निर्देश भी दिए गए। भुडूपानी के बच्चों को समेलीभांठा स्कूल तक आने-जाने में सुविधा के लिए ई-रिक्शा की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
बांस शिल्प से जुड़ेगा बिरहोर परिवारों का रोजगार
चौपाल के दौरान बिरहोर परिवारों की आजीविका का मुद्दा भी सामने आया। ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें बांस शिल्प में विशेष रुचि है। इस पर कलेक्टर ने बांस उपलब्ध कराने के साथ ही टोकरी सहित अन्य हस्तशिल्प उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण देने, आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने और तैयार उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।
प्रशासन की पहल का उद्देश्य बिरहोर परिवारों को स्थानीय संसाधनों और उनकी पारंपरिक कला से जोड़कर स्थायी आजीविका का आधार उपलब्ध कराना है।
ग्राम पंचायत की सरपंच अमिता राज ने भी गांव की विभिन्न समस्याओं से कलेक्टर को अवगत कराया। कलेक्टर ने सभी मांगों पर संवेदनशीलता से कार्रवाई का भरोसा दिलाते हुए कहा कि विशेष पिछड़ी जनजाति बिरहोर परिवारों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है।
बारिश से भीगे छोटे से कमरे में हुई यह चौपाल महज समस्याएं सुनने तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रशासन और बिरहोर परिवारों के बीच विश्वास, संवेदनशीलता और विकास के नए संवाद की मिसाल बन गई।
इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रतीक जैन, एसडीएम मनोज बंजारे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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