छत्तीसगढ़

जिला स्तरीय कृषक प्रशिक्षण सह कार्यशाला का हुआ आयोजन

कार्यशाला में किसानों को नवीनतम कृषि तकनीकों, योजनाओं एवं सरकार द्वारा संचालित विभिन्न लाभकारी कार्यक्रमों की विस्तार से दी जानकारी

कृषि नवाचारों और योजनाओं के माध्यम से बढ़ेगी किसानों की आय – कलेक्टर

कलेक्टर ने किसानों से की चर्चा, प्रगतिशील किसानों ने साझा किये अपने अनुभव

कृषि वैज्ञानिकों ने फसल चक्र परिवर्तन, ऑयल पाम खेती, दलहन-तिलहन, बागवानी, किसानों की आय बढ़ाने सहित विभिन्न विषयों पर दी गई जानकारी

जांजगीर-चांपा, 17 जुलाई 2025/ कलेक्टर जन्मेजय महोबे के निर्देशन में जिला स्तरीय कृषक प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन आज ऑडिटोरियम जांजगीर में किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, कृषि नवाचार, नवीनतम कृषि तकनीकों, योजनाओं एवं सरकार द्वारा संचालित विभिन्न लाभकारी कार्यक्रमों की जानकारी देना था। कार्यशाला में फसल चक्र, ऑयल पाम खेती, दलहन-तिलहन, बागवानी, मशरूम उत्पादन, मछली पालन, कुकुट पालन, पशुपालन, धान के बदले अन्य लाभकारी फसल, कीट प्रबंधन सहित अन्य महत्वपूर्ण कृषि विषयों पर किसानों को जानकारी दी गई। कार्यशाला में किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और स्थायी खेती के तरीकों से अवगत कराया गया, ताकि वे अपनी आय बढ़ा सकें और मिट्टी के स्वास्थ्य को भी बनाए रख सकें। कार्यशाला में कलेक्टर जन्मेजय महोबे सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में कृषक शामिल हुए।
कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने कहा कि जांजगीर-चांपा जिला किसानों की मेहनत और समर्पण के कारण एक कृषि प्रधान जिला के रूप में पहचाना जाता है। जिले की लगभग 89 प्रतिशत भूमि सिंचित है, जो कृषि के लिए बेहद अनुकूल वातावरण प्रदान करती है। कलेक्टर ने कहा कि कार्यशाला किसानों की आय बढ़ाने, उनकी शंकाओं का समाधान करने, शासन की योजनाओं की जानकारी देने और किसानो से सीधी चर्चा करने के उद्देश्य से आयोजित की गई है। उन्होंने उन्होंने कहा कि जिले के कुछ किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ लाभकारी फसलों, उद्यानिकी, मत्स्य पालन एवं पशुपालन जैसे क्षेत्रों में भी उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि जिले के अन्य किसानों को इसने प्रेरणा लेकर नवीनतम कृषि तकनीको व नवाचारो का उपयोग कर अधिक आय अर्जित करने किसानों से अपील की। कलेक्टर ने ब्लाक एवं कलस्टर स्तर पर कृषक प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन करने एवं एग्रीस्टेक में किसानों का पंजीयन करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि कृषक पंजीयन कृषि क्षेत्र में डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जिससे पारदर्शिता बढेगी और शासकीय योजनाओं का लाभ किसानों तक सीधे पहंुच सकेगा। साथ ही उन्होंने रबी में अन्य अधिक लाभदायक फसल लेने कृषकों को प्रेरित किया। साथ ही कार्यशाला में उपस्थित कृषि वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों द्वारा बताई गई आधुनिक तकनीकों व नवाचारों को अपनाकर कृषि को और अधिक समृद्ध बनाएं।

कार्यशाला में कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारीगण एवं विशेषज्ञों ने भी जानकारी साझा की। किसानों को विभिन्न कृषि संबंधी योजनाओं से अवगत कराते हुए उन्नत कृषि के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई एवं उनकी शंकाओं का समाधान किया गया। इस दौरान संबंधित विभागों द्वारा स्टॉल के माध्यम से कृषक पंजीयन, जैविक खेती, दलहन एवं तिलहन फसलों की विस्तृत जानकारी दी गई। इस दौरान प्रगतिशील किसानों ने अपने अनुभव को साझा किया। साथ ही किसानों की सफलता की कहानी को वीडियों के माध्यम प्रदर्शन भी किया गया। कार्यशाला में जिला पंचायत सदस्य सुश्री आशा साव, उमा राजेन्द्र राठौर, उप संचालक कृषि ललित मोहन भगत, सहायक संचालक उद्यान रंजना माखीजा, सहायक संचालक मत्स्य, कृषि वैज्ञानिक डॉ आशुलता धु्रव, शशिकांत सूर्यवंशी, डॉ आशीष प्रधान, डॉ राजीव दिक्षित, डॉ रंजीत मोदी, जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी, प्रगतिशील कृषक सहित बड़ी संख्या में कृषक एवं नागरिकजन उपस्थित थे।

ऑयल पाम खेती के बारे दी गई विस्तार से जानकारी

कार्यशाला में सहायक संचालक उद्यानिकी रंजना माखीजा एवं कृषि वैज्ञानिक डॉ राजीव दिक्षित ऑयल पाम की खेती के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कलेक्टर महोबे के निर्देशन में जिले में 500 हेक्टेयर में ऑयल पाम की खेती का लक्ष्य रखा गया है। ऑयल पाम अन्य तिलहन फसलों अधिक लाभदायक है एवं कम देखरेख की आवश्यकता होती है। ऑयल पाम का उत्पादन तीसरे वर्ष से प्रारंभ होकर 25 से 30 वर्षों तक होता है। पौधे की उम्र बढऩे के साथ-साथ उत्पादन में भी वृद्धि होती है। एक हेक्टेयर से प्रति वर्ष 15 से 20 टन तक उपज लिया जा सकता है और किसान सालाना ढ़ाई से तीन लाख रुपये तक की आय प्राप्त कर सकते है। ऑयल पाम के पौधे एक निश्चित दूरी में लगाए जाते है जिससे किसान इन पौधों के बीच अंतर्वर्ती फसल लगाकर अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। उत्पादित फसल की बिक्री हेतु भारत सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अनुबंधित कंपनियां सीधे खेत से फसल की खरीदी करती है। इसका भुगतान किसानों को डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सीधे बैंक खाते में किया जाता है।

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