छत्तीसगढ़

वैदिक स्कूल के मेधावी छात्र सम्मान समारोह में डीएसपी साइबर अनिल विश्वकर्मा ने दिया साइबर सुरक्षा का संदेश

छात्रों को बताए ठगी के नये तरीके और बचाव के उपाय

साइबर डीएसपी ने बताया एआई और कंप्यूटर फॉरेंसिक में है सुनहरा भविष्य

रायगढ़, 7 सितंबर । पुलिस अधीक्षक दिव्यांग पटेल के दिशा-निर्देशन पर आज उप पुलिस अधीक्षक (साइबर)  अनिल विश्वकर्मा ने वैदिक स्कूल में आयोजित मेधावी छात्र सम्मान समारोह में छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक किया। कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आजकल साइबर अपराधी नये-नये तरीके अपनाकर लोगों को ठग रहे हैं, इसलिए ऑनलाइन शॉपिंग, नेट बैंकिग और विशेषकर सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफार्म का उपयोग अत्यंत सावधानी से करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज का दौर डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित है, इसलिए छात्रों को चाहिए कि वे एआई, कंप्यूटर फॉरेंसिक जैसे पाठ्यक्रमों को भी अपनाएं, जिनमें भविष्य की अपार संभावनाएं हैं। साइबर फॉरेंसिक के क्षेत्र में अच्छा काम करने वाले युवाओं की आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत मांग है। राज्य सरकार भी इस ओर काफी कार्य कर रही है ।
श्री विश्वकर्मा ने कहा कि वर्तमान में साइबर अपराधियों द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दुरुपयोग कर नये-नये तरीके से लोगों को ठगा जा रहा है। शहरों में इसका शिकार अधिक हो रहा है क्योंकि वहां ऑनलाइन लेनदेन और सोशल मीडिया का उपयोग गांव की तुलना में कहीं ज्यादा है। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे स्वयं जागरूक रहें और अपने परिवार तथा आसपास के लोगों को भी साइबर अपराधों से बचने के उपाय बताएं।

आगे डीएसपी श्री विश्वकर्मा ने छात्रों को बताया कि साइबर अपराधियों द्वारा ठगी के प्रमुख तरीकों में अंजान लिंक या संदिग्ध वेबसाइट पर क्लिक कर अकाउंट हैक करना, फेक कॉल कर बैंक अधिकारी या सरकारी प्रतिनिधि बनकर ओटीपी और पिन की जानकारी लेना, सोशल मीडिया पर प्रोफाइल क्लोन कर रिश्तेदार या दोस्त बनकर पैसों की मांग करना, ऑनलाइन गेमिंग व शॉपिंग एप्स में फर्जी ऑफर देकर पैसे हड़पना, और क्रिप्टो या शेयर बाजार में भारी मुनाफे का झांसा देकर निवेश कराना शामिल है। उन्होंने यह भी समझाया कि साइबर अपराधी अक्सर डराने, लालच देने या जल्दी निर्णय लेने का दबाव बनाकर लोगों से ठगी करते हैं।
बचाव के उपाय बताते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी, एटीएम पिन और बैंक डिटेल किसी के साथ साझा न करें, संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत कॉल डिस्कनेक्ट कर दें, सोशल मीडिया पर अपनी प्रोफाइल और निजी जानकारी सीमित लोगों तक ही साझा करें और किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति साइबर अपराध का शिकार होता है तो बिना समय गंवाए तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं या फिर सरकारी पोर्टल cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें।
कार्यक्रम में प्रधान आरक्षक दुर्गेश सिंह ने भी साइबर मामलों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वयं की जागरूकता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने छात्रों से सतर्क रहने और अपने परिवार व परिचितों को भी जागरूक करने की अपील की।
इस अवसर पर विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकगण, छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और साइबर अपराधों से बचाव के लिए उपयोगी जानकारी प्राप्त की।

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