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जिंदल में नौकरी लगवाने महिला ने ठगे 31 लाख, FIR के निर्देश

आयोग ने कहा- सोच-समझकर करें दूसरा विवाह

NPA अकाउंट में बैंक से सुलहनामा का प्रयास कराया जायेगा

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक, सदस्य लक्ष्मी वर्मा ने आज छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के कार्यालय रायपुर में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों पर सुनवाई की। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में प्रदेश स्तर पर गुरुवार को 356 वी. एवं रायपुर जिले में 172 वी. जनसुनवाई की गई।

सुनवाई के दौरान एक प्रकरण में आवेदिका ने बताया की आवेदिका के पति की मृत्यु के पहले पति ने लगभग 2015-2016 में बैंक से व्यवसाय के लिए लोन लिया था। लेकिन 2022 में आवेदिका के पति की मृत्यु हो जाने और आवेदिका के पास रोजगार का साधन नहीं होने से लोन पटाया नही जा सका। आवेदिका के 2 बच्चे, सास व लकवा ग्रस्त ससुर है। आवेदिका ही सभी का पालन-पोषण वर्तमान में स्कूल में आया का काम करके करती है। लोन के एवज में आवेदिका का मकान अनावेदक बैंक के पास गिरवी रखा है जो एकाउंट एनपीए हो गया है। लोन का मूलधन 11 लाख ब्याज सहित 16 लाख रू. होता है। अनावेदक ने आयोग के समक्ष व्यक्त किया कि आवेदिका की परिस्थिति को देखते हुए ब्याज माफ कर मूलधन 11 लाख रू. आवेदिका को देना होगा। आवेदिका ने अपने परिवार से सहयोग लेकर साढे 6 से 7 लाख रू. ही दे पाने का प्रस्ताव रखा है। आयोग के द्वारा उभय पक्षों को सुना गया और अनावेदक बैंक की ओर से उपस्थित ब्रांच मैनेजर को समझाईश दिया कि आवेदिका की पारिवारिक आर्थिक परिस्थिति को देखते हुए मूलधन राशि में छूट दिलाने हेतु प्रयास करें इस पर अनावेदक ने एक समय की मांग की। आवेदिका को भी समझाईश दिया गया कि वह मूलधन लौटाने के लिए अपने पारिवारिक स्तर पर तैयारी करें इस हेतु उभय पक्ष को 02 माह का समय दिया गया।
अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि आवेदिका व अनावेदक का दूसरा विवाह है जो मई 2025 में हुआ था। विवाह के 3 माह बाद से ही दोनो अलग रह रहे है। दोनो के मध्य सुलह हेतु काफी प्रयास किया गया आवेदिका साथ रहने के लिए तैयार है लेकिन अनावेदक ने एकमुश्त भरण-पोषण देकर आपसी राजीनामा से तलाक का प्रस्ताव रखा है जिसपर आवेदिका अभी सहमत नहीं है। वह चाहती है उसके सास-ससुर भी सुनवाई में उपस्थित हो उसके बाद ही चर्चा किया जाये। अनावेदक को आयोग की ओर से समझाईश दिया गया कि वह अपने माता-पिता को लेकर आयोग मे उपस्थित हो ताकि प्रकरण का निराकरण किया जा सके।

एक प्रकरण में अनावेदिका ने आवेदिका क्र.1 से 6 लाख, आवेदिका क्र.2 से 5 लाख, आवेदिका क्र.3 से 10 लाख व आवेदिका क्र.4 से 10 लाख रू. आवेदिकागणों के परिवारजनों को नौकरी लगाने के नाम पर लिया था और कहा था कि जिंदल कंपनी में नौकरी लगवा देंगे। आवेदिकागणों ने भरोसा करके अनावेदिका को पैसे दिये लेकिन अनावेदिका ने नौकरी नहीं लगवाई और आवेदिकागणों के पैसे भी वापस नहीं किये। अनावेदिका के खिलाफ नौकरी लगाने के नाम पर धोखाधड़ी व षड्यंत्र किये जाने पर कड़ी कार्यवाही कर आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया व अनावेदकगणों के थाना-सारागांव, जिला- जांजगीर-चांपा को कार्यवाही हेतु प्रेषित किया गया।

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