
हनुमान मंदिर पार्क में कार्यक्रम, ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ अभियान से लोगों को किया गया जागरूक


जशपुरनगर 09 मार्च 2026/ अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जशपुर के हनुमान मंदिर पार्क में महिलाओं के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं को सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूक करने के साथ-साथ बाल विवाह रोकने का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर क्षत्रिय समाज की अध्यक्ष जया सिंह जूदेव ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि समाज से बाल विवाह जैसी कुप्रथा को समाप्त करने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे स्वयं बाल विवाह न करें और न ही अपने आसपास कहीं बाल विवाह होने दें। समाज में जागरूकता बढ़ाकर ही बाल विवाह मुक्त समाज का निर्माण किया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान जिले में चलाए गए ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ अभियान की भी जानकारी दी गई। यह अभियान भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल पर चलाए गए 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान के अंतर्गत संचालित किया गया। इस अभियान का उद्देश्य बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ समाज में व्यापक जागरूकता फैलाना और लोगों को इसके कानूनी व सामाजिक दुष्परिणामों से अवगत कराना है।
जिले में इस अभियान की शुरुआत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को हरी झंडी दिखाकर की गई थी। लगभग 30 दिनों तक चले इस अभियान के दौरान रथ ने जिले में करीब 2120 किलोमीटर की यात्रा की और 35 गांवों तक पहुंचकर 7133 लोगों को बाल विवाह के खिलाफ जागरूक किया।
अभियान के दौरान लोगों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई गई तथा इसके कानूनी पहलुओं की जानकारी दी गई। जागरूकता कार्यक्रमों में यह भी बताया गया कि बाल विवाह बच्चों के अधिकारों का हनन है और कानून की नजर में यह दंडनीय अपराध है।
समर्पित एक्सेस टू जस्टिस फॉर चिल्ड्रेन संस्था के निदेशक डॉ. संदीप शर्मा ने बताया कि यह अभियान केवल एक प्रतीकात्मक यात्रा नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन का संदेश था। बाल विवाह किसी भी बच्ची के जीवन की संभावनाओं को सीमित कर देता है और उसे कुपोषण, अशिक्षा तथा गरीबी के दुष्चक्र में धकेल देता है।
उन्होंने कहा कि सरकार, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और समाज के सहयोग से यह अभियान जनभागीदारी का रूप ले चुका है और इससे बाल विवाह मुक्त जशपुर के लक्ष्य को प्राप्त करने में बड़ी मदद मिलेगी।
अभियान के तीन चरणों में विद्यालयों और महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं, धर्मगुरुओं, पंचायत प्रतिनिधियों तथा विवाह समारोहों में सेवाएं देने वाले लोगों को जोड़ा गया। धर्मगुरुओं से विवाह संपन्न कराने से पहले वर-वधू की आयु की जांच करने का आग्रह किया गया, वहीं कैटरर्स, बैंड संचालकों, सजावट करने वालों और बैंक्वेट हॉल संचालकों से भी बाल विवाह में सहयोग न करने की अपील की गई।
कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता फैलाने और समाज को इस कुप्रथा से मुक्त बनाने का संकल्प लिया।



